तीन दिन में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में डाले करीब 29,096 करोड़ रुपये
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3 से 5 नवंबर 2026 के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 29,095.52 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीद की। जनवरी से अक्टूबर तक वे बिकवाली करते रहे थे।
लंबे वक्त की बिकवाली के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार में लौटे हैं और उन्होंने बड़ी खरीद शुरू कर दी है। सिर्फ तीन कारोबारी दिनों में उन्होंने भारतीय शेयरों में करीब 29,096 करोड़ रुपये लगाए हैं। इस अचानक बढ़े निवेश से बाजार में जोश दिखा है।
आंकड़ों के मुताबिक 3 से 5 नवंबर 2026 के बीच FII ने भारतीय शेयर बाजार में 29,095.52 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीद की। 3 नवंबर को यह खरीद 6,836.81 करोड़ रुपये की रही, 4 नवंबर को 7,284.03 करोड़ रुपये की और 5 नवंबर को 14,974.68 करोड़ रुपये की। यानी 5 नवंबर को विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा खरीदारी की। इससे पहले जनवरी से अक्टूबर 2026 के दौरान विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 30 अरब डॉलर निकाल चुके थे।
विदेशी निवेशकों की वापसी की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आई गिरावट मानी जा रही है। 4 नवंबर को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 9 प्रतिशत गिरकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से खरीदता है, इसलिए सस्ते तेल से देश का आयात बिल कम हो सकता है। इसके अलावा महंगाई का दबाव घटने और कंपनियों का खर्च कम होने की गुंजाइश है। इसका फायदा विमानन, पेंट, केमिकल और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों को मिल सकता है।
अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर चिंता बढ़ी है। इसलिए निवेशक अपना पोर्टफोलियो अलग-अलग जगह बांटने के लिए दूसरे बाजारों की तरफ देख रहे हैं। भारत का शेयर बाजार बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और घरेलू खपत जैसे सेक्टरों पर काफी टिका है, इसलिए वह विदेशी निवेशकों के लिए एक विकल्प हो सकता है।
अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में भी कमी आई है। 3 से 5 नवंबर के बीच 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4.95 प्रतिशत से गिरकर 4.84 प्रतिशत पर आ गई। इससे विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों में पैसा लगाना तुलनात्मक रूप से आकर्षक हो सकता है।
पहले के मुकाबले भारतीय शेयरों के वैल्यूएशन में सुधार आया है और विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी भी कम है। इन्हें भी इस निवेश की वजह माना जा रहा है।
इन्हीं तीन दिनों में घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने करीब 17,835.62 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी निवेशक कितने समय तक लौटे रहेंगे, यह कच्चे तेल के दाम, रुपये की हालत, अमेरिका की ब्याज दरों और भारतीय कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा। इसलिए सिर्फ तीन दिन की खरीद को बाजार में टिकाऊ तेजी की निशानी मान लेना जल्दबाजी होगी।
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