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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी

किल्ला कोर्ट ने पुलिस की 14 दिन की मांग पर 10 दिन की कस्टडी दी।

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई: अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग केस में कोर्ट ने आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। किल्ला कोर्ट में हुई सुनवाई में मुंबई पुलिस ने जांच के लिए 14 दिन की पुलिस कस्टडी मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने 10 दिन की कस्टडी मंजूर की।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इस्तेमाल हुए हथियार, नष्ट किए गए मोबाइल और जुर्म के पीछे की संभावित साजिश की जांच के लिए आरोपियों से पूछताछ जरूरी है।

कोर्ट में पेशी के वक्त आरोपियों ने शुरू में वकालतनामे पर दस्तखत करने से मना कर दिया। उन्होंने सवाल किया कि यह कागज किस लिए है और इस पर दस्तखत क्यों करने हैं। वकीलों के समझाने के बाद उन्होंने वकालतनामे पर दस्तखत किए। सुनवाई को देखते हुए किल्ला कोर्ट के बाहर पुलिस का कड़ा बंदोबस्त रखा गया था।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि फायरिंग के बाद आरोपियों ने जुर्म में इस्तेमाल हुए दो मोबाइल नष्ट कर दिए। इन मोबाइल को ढूंढना और यह पता लगाना जरूरी है कि हथियार कहां छिपाया या फेंका गया। पुलिस के मुताबिक इस जुर्म का दायरा बड़ा है और जांच के लिए दूसरे राज्यों में भी जाना पड़ेगा। हथियार आरोपियों को कहां से मिला, उनके पास और हथियार हैं या नहीं और इस मामले में किसी और का हाथ है या नहीं, यह भी जांचना है।

इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित साथी अनिल पंडित के नाम से धमकी आने का दावा किया गया है। फायरिंग के बाद एक ऑडियो क्लिप सामने आई, जिससे मामले की गंभीरता बढ़ गई। पुलिस ने कोर्ट में कहा कि इस ऑडियो क्लिप और फायरिंग की घटना के बीच आपसी संबंध है या नहीं, इसकी भी जांच करनी है।

फायरिंग के बाद आरोपी फरार हो गए थे। बाद में उन्हें राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया गया और ट्रांजिट रिमांड के आधार पर मुंबई लाया गया।

सुनवाई में आरोपियों के वकीलों ने पुलिस कस्टडी का विरोध किया। उनका दावा था कि उनके मुवक्किलों का इस जुर्म से कोई लेना-देना नहीं है। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी बेकसूर हैं और किसी साजिश में शामिल नहीं हैं, इसलिए उन्हें और पुलिस कस्टडी में रखने की जरूरत नहीं।

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपियों को पहले ही 48 घंटे की पुलिस कस्टडी मिल चुकी है और उनसे पूछताछ हो चुकी है। ट्रांजिट रिमांड भी मंजूर हो चुका है और पुलिस कुछ अहम जब्तियां कर चुकी है। इसलिए मांग की गई कि उन्हें और पुलिस कस्टडी देने की बजाय न्यायिक हिरासत में भेजा जाए।

सरकारी पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई और दोपहिया गाड़ी का सुराग निकाला गया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने साफ किया कि इस मामले में और लोगों के शामिल होने की आशंका है और उनकी भूमिका तय करना जरूरी है। पुलिस के मुताबिक जांच में दूसरे आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। अलग-अलग राज्यों में हुई कार्रवाई से मिली जानकारी को जोड़कर पूरी साजिश का पता लगाने की कोशिश चल रही है।

अब किल्ला कोर्ट के आदेश के बाद जांच तेज होने की उम्मीद है। पुलिस का जोर नष्ट किए गए मोबाइल, फायरिंग में इस्तेमाल हथियार, धमकी की ऑडियो क्लिप और दूसरे संदिग्धों की भूमिका पर रहेगा। इस बीच बताया गया है कि मुंबई पुलिस शाम 5.30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और जानकारी देगी।

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