सुशीलकुमार शिंदे बोले, कांग्रेस में ही रहूंगा, बीजेपी में जाने की अटकलों पर दिया जवाब
नाती के मोदी बैनर से उठी बीजेपी प्रवेश की चर्चा पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशीलकुमार शिंदे ने साफ कहा कि वे कांग्रेस में ही रहेंगे।
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राज्य की राजनीति में इन दिनों काफी हलचल है। इसी बीच पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशीलकुमार शिंदे बीजेपी में जाने वाले हैं। अब खुद शिंदे ने इस पर अपनी बात रखी है और कहा है कि वे कांग्रेस में ही रहेंगे।
चर्चा की शुरुआत तब हुई जब शिंदे के नाती शिखर पहारिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुभकामनाओं वाले बैनर लगाए। इसके बाद बीजेपी प्रवेश की अटकलें तेज हो गईं। नाती के इस कदम का समर्थन करते हुए शिंदे ने राजनीति और निजी रिश्तों को लेकर अपना रुख साफ किया। उन्होंने "मैं कांग्रेस में ही रहूंगा" कहकर इन अटकलों पर पूर्णविराम लगा दिया।
शिंदे ने सवाल किया कि शिखर पहारिया ने मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाओं का बैनर लगा दिया तो इसमें इतना बिगड़ क्या गया। उन्होंने बताया कि वे खुद भी हाल ही में प्रधानमंत्री से मिले थे। उनका कहना है कि किसी नेता को शुभकामना देने या उससे मुलाकात करने से अपनी राजनीतिक विचारधारा नहीं बदल जाती। उनके बयान का संदेश यह भी है कि राजनीति में हर बात का अलग मतलब निकालने के बजाय उसे समझदारी से देखना चाहिए।
शिंदे ने यह भी खुलासा किया कि बीजेपी में आने के लिए उन्हें भी कई बार कहा गया है। लेकिन उन्होंने साफ किया कि वे कांग्रेस में हैं और वहीं काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि बीजेपी में हाल ही में गए कुछ नेताओं का हाल भी उन्होंने देखा है। शिंदे के मुताबिक करीब 25 साल पहले भी कई नेताओं ने पार्टी छोड़ी थी और उनमें से कुछ लोग कुछ साल बाद वापस लौट आए।
शिंदे ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे जितनी बात करते हैं, उतनी ही शरद पवार से भी करते हैं। उनका रुख यही दिखा कि नेताओं की मुलाकातों या किसी कार्यक्रम में शामिल होने से फौरन अलग मतलब नहीं निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मोदी की तरफ से कुछ अच्छी चीजें होती हैं तो कुछ फैसलों की आलोचना भी होती है। शिंदे के अनुसार इन सबका विश्लेषण पत्रकारों को करना चाहिए।
शिंदे ने यह भी बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक किताब पढ़ी है और कम्युनिस्ट पार्टी के इतिहास के बारे में भी जानकारी ली है। राजनीतिशास्त्र के विद्यार्थी के नाते अलग-अलग विचारधाराओं को समझना उन्हें जरूरी लगता है। कुल मिलाकर, नाती के बैनर से शुरू हुई चर्चा के बहाने शिंदे ने कांग्रेस में अपनी भूमिका और दूसरी पार्टियों को लेकर अपना नजरिया साफ कर दिया है।
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