शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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सूखे से निपटने के लिए नदी-नालों पर CSR फंड से बांध बनें: विधायक जोरगेवार की मांग

सूखे से निपटने के लिए नदी-नालों पर CSR फंड से बांध बनें: विधायक जोरगेवार की मांग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

चंद्रपुर जिले में कम बारिश की वजह से सूखे जैसे हालात बन गए हैं। इसे देखते हुए विधायक किशोर जोरगेवार ने मांग की है कि अगले गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत न हो, इसके लिए अभी से इंतजाम शुरू किए जाएं। उन्होंने जिलाधिकारी को चिट्ठी लिखकर कहा है कि जिले की नदियों, नालों और धाराओं में अभी जो पानी है, उसे रोका जाए और उससे भूजल स्तर बढ़ाया जाए।

इसके लिए उन्होंने वेकोलि, महाजेनको, सीमेंट कंपनियों और दूसरे बड़े उद्योगों के CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी) फंड से तुरंत बांध बनाने की मांग की है।

जोरगेवार ने चिट्ठी में लिखा है कि इस साल कम बारिश का असर खेती समेत कई क्षेत्रों पर पड़ा है। बारिश ने खींच लिया तो किसानों के सामने सिंचाई का सवाल खड़ा हो गया है। आगे चलकर उद्योगों को भी पानी की उपलब्धता को लेकर दिक्कत आ सकती है। अभी कुछ नदियों, नालों और धाराओं में पानी है, लेकिन बढ़ते तापमान और बारिश की कमी को देखते हुए आने वाले समय में ये जलस्रोत सूख सकते हैं। इसलिए उनके मुताबिक पानी की हर बूंद को रोकना और बचाना जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, इसलिए आने वाली गर्मी में पीने के पानी की समस्या गंभीर होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में गर्मी आने पर सिर्फ टैंकर या दूसरे वैकल्पिक उपाय करने के बजाय अभी से जल संरक्षण के काम हाथ में लेने चाहिए। नदी, नालों और धाराओं में बह रहे पानी को सही जगह रोका जाए तो भूजल स्तर बढ़ने में मदद मिलेगी। इसका फायदा खेती, आम लोगों और उद्योग क्षेत्र, तीनों को मिल सकेगा, ऐसी उनकी राय है।

जोरगेवार का प्रस्ताव है कि जिले की बड़ी कंपनियां अपने CSR फंड का असरदार इस्तेमाल करें। वेकोलि, महाजेनको, सीमेंट उद्योग और दूसरी कंपनियां अपने CSR फंड से कम से कम एक जल संरक्षण का काम जरूर उठाएं। इनमें प्लास्टिक वाले बांध, सीमेंट नाला बांध और वनराई बांध जैसे उपाय शामिल किए जाएं, ऐसी उनकी मांग है।

काम की शुरुआत के लिए उन्होंने कहा है कि सबसे पहले राजस्व और सिंचाई (जल संसाधन) विभाग के जरिए जिले की उन नदियों, नालों और धाराओं का तुरंत सर्वे हो, जिनमें अभी पानी बह रहा है। पानी रोकने के लिए ठीक जगहें तय करके बांध बनाने की योजना बनाई जाए। साथ ही कंपनियां सिर्फ पैसा देकर न रह जाएं, बल्कि अपनी तरफ से जेसीबी, पोकलेन जैसी मशीनें और जरूरी मजदूर भी उपलब्ध कराएं। उनके मुताबिक इससे ये काम युद्धस्तर पर पूरे हो सकेंगे और प्रशासन पर अतिरिक्त बोझ भी कम पड़ेगा।

जोरगेवार ने यह मांग भी की है कि जिलाधिकारी खुद ध्यान देकर जिले की सभी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों की बैठक तुरंत बुलाएं। उस बैठक में CSR फंड से होने वाले जल संरक्षण कामों की योजना बने और हर कंपनी को कम से कम एक काम की जिम्मेदारी सौंपी जाए।

विधायक किशोर जोरगेवार ने अपील की है कि अगली गर्मी में लोगों को पीने के पानी के लिए जूझना न पड़े, किसानों को सिंचाई का पानी मिले और उद्योगों को भी पानी की कमी न झेलनी पड़े। इसके लिए मौजूद जलस्रोतों को बचाना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। पानी की हर बूंद रोकने के लिए प्रशासन और औद्योगिक कंपनियां मिलकर, तालमेल के साथ तुरंत काम पर लगें।

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