बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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20:31 IST

सूडान-मिस्र सीमा के पास सोने की खदान पर हवाई हमला, 72 मजदूरों की मौत

सूडान और मिस्र की विवादित सीमा के पास एक बिना लाइसेंस की सोने की खदान पर हवाई हमले में 72 मजदूर मारे गए, कई घायल हुए।

सूडान-मिस्र सीमा के पास सोने की खदान पर हवाई हमला, 72 मजदूरों की मौत तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

सूडान और मिस्र की सीमा वाले इलाके से एक दिल दहला देने वाली खबर आई है। दोनों देशों की विवादित सीमा के पास एक अवैध सोने की खदान पर हवाई हमला हुआ। इस हमले में 72 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की दी हुई जानकारी के मुताबिक हमले के वक्त इस सुनसान इलाके में हजारों मजदूर सोने की तलाश में काम कर रहे थे। अचानक हुई बमबारी से पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई और मजदूर जान बचाने के लिए जिधर रास्ता मिला उधर भागे।

'इमर्जेंसी लॉयर्स' नाम की एक मानवाधिकार संस्था ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया है कि यह हमला मिस्र की वायुसेना (Egyptian Air Force) ने किया था। हालांकि संस्था ने अपने दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक सबूत पेश नहीं किया है। हमले के पीछे किसका हाथ था, इसकी अब तक कोई स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी तरफ मिस्र की सरकार या उसकी सेना ने इस पूरी घटना पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इसी वजह से हमले का रहस्य और गहरा गया है।

हमले से बचकर निकले दो मजदूरों ने एजेंसी फ्रांस-प्रेस (AFP) से बात करते हुए उस वक्त का हाल बताया। एक चश्मदीद के मुताबिक एक लड़ाकू विमान ने खदान के इलाके पर लगातार पांच बार बम बरसाए। विमान की तेज आवाज और एक के बाद एक हुए धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा। और हमले होने के डर से घबराए हुए मजदूर पास के पहाड़ी इलाके की तरफ भाग गए और वहां घंटों छिपे रहे।

दूसरे चश्मदीद ने बताया कि धमाके होते ही खदान के हजारों मजदूर जान बचाने के लिए बिखर गए। कुछ लोग अल-अंसारी गोल्ड मार्केट की तरफ दौड़े, तो कुछ रेगिस्तान की तरफ निकल गए। भागते वक्त उन्होंने सड़क के किनारे और रेत में कई मजदूरों की लाशें बिखरी देखीं। खदान के विशाल मलबे के नीचे और भी कई मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। इसलिए स्थानीय संगठनों के मुताबिक असल में मरने वालों की तादाद 72 से कहीं ज्यादा हो सकती है।

सूडान-मिस्र सीमा पर सोने की खदानों पर हमले की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले जून महीने में भी मिस्र की सीमा के पास 'जबल अल-उकायदात' नाम की बिना लाइसेंस की सोने की खदान पर ऐसा ही हवाई हमला हुआ था। उस हमले में 23 बेगुनाह मजदूर मारे गए थे। तब भी इस हमले के लिए मिस्र को ही जिम्मेदार ठहराया गया था।

जून की घटना के बाद मिस्र की सेना ने सफाई देते हुए कहा था कि उसने अपनी सीमा के भीतर अवैध सोने की खुदाई के खिलाफ एक खास अभियान शुरू किया है। लेकिन उसने खदान पर सीधे बमबारी का कोई जिक्र नहीं किया था। लगातार दूसरी बड़ी घटना होने से सीमा के इलाके की सोने की खदानों में मामूली कमाई के लिए जान जोखिम में डालकर काम करने वाले गरीब मजदूरों की सुरक्षा का सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है।

सूडान और मिस्र के बीच 'हलाइब त्रिकोण' (Halaib Triangle) नाम के भूभाग को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। यह बड़ा इलाका सोने और दूसरी कीमती खनिज संपदा से भरपूर है, इसलिए दोनों देश इस पर अपना दावा करते हैं। भू-राजनीतिक नजरिए से यह इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है। खास बात यह है कि मिस्र को सूडानी सेना के प्रमुख अब्देल फतह बुरहान का करीबी मित्र देश माना जाता है।

दूसरी तरफ सूडान खुद तीन साल से ज्यादा वक्त से अंदरूनी गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है। सूडानी सेना और मोहम्मद हमदान डगलो की अगुवाई वाले अर्धसैनिक बल 'रैपिड सपोर्ट फोर्सेस' (RSF) के बीच चल रहे इस खूनी संघर्ष में अब तक 2 लाख से ज्यादा आम लोगों की जान जा चुकी है। देश की इस राजनीतिक अस्थिरता और अराजकता की मार सीमा के इलाके के गरीब मजदूरों को झेलनी पड़ रही है।

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