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18:48 IST

स्पंदना माइक्रो फाइनेंस के शाखा मैनेजर जांभुळे की संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जांच की मांग

राष्ट्रीय भारत आदिवासी पार्टी ने पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी, वर्धा को निवेदन देकर कालिदास जांभुळे की मौत में हत्या या घातपात की आशंका परखने की मांग की।

स्पंदना माइक्रो फाइनेंस के शाखा मैनेजर जांभुळे की संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जांच की मांग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

राष्ट्रीय भारत आदिवासी पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष मंगेश सराटे की अगुवाई में 6 अक्टूबर 2026 को वर्धा के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को एक निवेदन सौंपा गया। इसमें कालिदास पुंडलिक जांभुळे की संदिग्ध मौत की गहरी और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। निवेदन में कहा गया है कि हत्या या घातपात की संभावना भी जांची जाए और जहां लागू हो, वहां SC/ST (अत्याचार प्रतिबंधक) कानून के तहत कार्रवाई हो।

कालिदास जांभुळे स्पंदना माइक्रो फाइनेंस संस्था में शाखा मैनेजर थे। निवेदन के मुताबिक 7 सितंबर 2026 को उनके बारे में एक घटना होने की बात सामने आई और 9 सितंबर 2026 को उनका शव मिला। मौत के हालात संदिग्ध हैं, इसलिए हर पहलू से निष्पक्ष जांच जरूरी बताई गई है।

निवेदन में कहा गया है कि मौत की असली वजह और तरीके को लेकर शुरुआती हालात से ही शक पैदा होता है। इसलिए सिर्फ पहली नजर के अंदाजे पर यह नतीजा नहीं निकालना चाहिए कि यह आत्महत्या थी या कुछ और। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, इन्क्वेस्ट पंचनामा, घटनास्थल का पंचनामा, डॉक्टरों की राय, मौजूद तस्वीरें और दूसरे वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर ही मौत का कारण तय किया जाए।

जांच के लिए कुछ खास मुद्दे गिनाए गए हैं। 7 सितंबर 2026 को सुबह 6:45 से 11:00 बजे के बीच मृतक की गतिविधियों, संपर्कों और घटनाक्रम की पड़ताल की मांग है। HR या कंपनी ने पुलिस को जो रिपोर्ट दी, उसमें बताई गई रकम और घटनाओं को असली कागजात से मिलाने को कहा गया है। संस्था के संबंधित HR अधिकारी, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारियों की भूमिका और मृतक से उनके रिश्तों को भी जांचने की बात है।

निवेदन यह भी पूछता है कि HR या कंपनी के अधिकारी-कर्मचारी किसकी जानकारी पर मृतक के घर गए, उन्हें घर जाने की खबर किसने दी, उनके साथ कौन था और उस वक्त घर में कौन मौजूद था। बैंक खाते, लॉकर या लॉक खोलने की एंट्री, CCTV फुटेज, संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी और इजाजत की गहरी जांच मांगी गई है। अगर मौत के कुछ दिन बाद लॉकर या लॉक खोला गया हो, तो उस पूरी प्रक्रिया की वैधता और उस वक्त मौजूद लोगों की जांच करने को कहा गया है।

7 से 9 सितंबर 2026 के बीच के कॉल रिकॉर्ड, उपलब्ध CCTV, मोबाइल लोकेशन और इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी खंगालने की मांग है। मौत से पहले और बाद में मृतक के संपर्क में रहे लोगों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए जाएं। घटनास्थल के सारे सबूत सुरक्षित रखकर उनकी वैज्ञानिक जांच कराई जाए।

SC/ST कानून को लेकर अलग से मांग की गई है। मृतक अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के थे, इसलिए SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के लागू प्रावधानों पर भी विचार हो। खास तौर पर यह अलग से जांचा जाए कि आरोपी या संदिग्धों को मृतक की आदिवासी पहचान की जानकारी थी या नहीं, और अपराध का संबंध उनकी ST पहचान से था या नहीं। निवेदन के मुताबिक कानून की धारा 3(2)(v) खास हालात में SC/ST व्यक्ति के खिलाफ गंभीर अपराध पर लागू हो सकती है, लेकिन इसके लिए कानून के जरूरी तत्व जांच में साबित होने चाहिए। नियमों में यह भी प्रावधान है कि SC/ST कानून का अपराध लागू होने पर जांच अधिकारी DySP से नीचे के दर्जे का न हो।

निवेदन में आखिरी मांग यह रखी गई कि किसी को सिर्फ शक के आधार पर दोषी न ठहराया जाए और सबूतों के आधार पर असली सच सामने लाया जाए।

निवेदन देते वक्त पूर्व लोकसभा उम्मीदवार और पारधी सेल के प्रदेश अध्यक्ष किशोर पवार, विदर्भ संयोजक राजू कन्नाके, विदर्भ मुख्य संयोजक अजित इरपाते, एडवोकेट मंगेश चायरे, सामाजिक कार्यकर्ता मोहित खंडार और कर्मा भोसले मौजूद थे। पीड़ित परिवार के सदस्य पुंडलिक जांभुळे और ज्ञानेश्वर जांभुळे के साथ समाज के काफी लोग भी आए थे।

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