सोलापुर जिला बैंक: अकलूज में मोहिते-पाटील गुट की बैठक, रणजितसिंह से सक्रिय होने की मांग
अकलूज के शिवरत्न बंगले पर हुई बैठक में रणजितसिंह मोहिते-पाटील ने बैंक के कामकाज पर लगे आरोपों का जवाब दिया और अपने कार्यकाल के आंकड़े रखे।
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सोलापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन रणजितसिंह मोहिते-पाटील ने विरोधियों के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा, "मैं सोलापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक का चेयरमैन था, तब मेरी कोई निजी चीनी फैक्टरी नहीं थी। अपनी किसी भी संस्था के लिए मैंने एक रुपये का भी कर्ज नहीं लिया था। विरोधियों ने यह अपप्रचार किया कि मोहिते-पाटील ने चेयरमैन पद का गलत फायदा उठाकर अपनी फैक्टरी और संस्थाओं के लिए सैकड़ों करोड़ के कर्ज लिए और उन्हें चुकाया नहीं, इसी वजह से डीसीसी बैंक बदहाल हो गई।"
अकलूज के शिवरत्न बंगले पर सोलापुर जिले के नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठक रखी गई थी। इसमें रणजितसिंह मोहिते-पाटील ने बैंक के कामकाज पर अपनी भूमिका रखी। सांसद धैर्यशील मोहिते-पाटील समेत जिले की अलग-अलग तहसीलों से नेता और कार्यकर्ता आए थे।
रणजितसिंह ने कहा, "सोलापुर जिले की राजनीति को फिर पटरी पर लाने के लिए मैं बिना किसी अहंकार के जिले के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के दरवाजे पर जाऊंगा। मैंने सबको फोन किए हैं। जिले की मौजूदा राजनीति देखकर सबकी उम्मीद है कि बदलाव हो। हमें उम्मीद से भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।"
अभी सोलापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की चुनाव प्रक्रिया चल रही है। इसी बीच पूर्व विधायक रणजितसिंह और सांसद धैर्यशील ने जिले की राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। विरोधियों के आरोपों का जवाब देने के साथ सहकारी क्षेत्र के चुनाव के लिए मोर्चाबंदी भी शुरू हो गई है।
बैठक में जिले की हर तहसील से मोहिते-पाटील गुट के कार्यकर्ता पहुंचे थे। उन्होंने मांग की कि रणजितसिंह सक्रिय राजनीति में आगे आएं, पूरे जिले में घूमकर नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करें और जिले को उसका पुराना वैभव लौटाएं।
कुछ नेताओं ने कहा कि जिले के बाहर से आए नेताओं के दखल से सोलापुर की राजनीति बिगड़ गई है। उनके मुताबिक पैसों के बंटवारे, सत्ता के दबाव, दमन और तोड़फोड़ की राजनीति से माहौल खराब हुआ है। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि जिले में फिर से सुसंवाद और एकता बनाने के लिए मोहिते-पाटील पहल करें।
विधायक अभिजित पाटील ने बैंक के कामकाज पर बोलते हुए प्रशासक की भूमिका की आलोचना की। उन्होंने कहा, "बैंक की स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने बैंक पर प्रशासक नियुक्त किया। लेकिन इस प्रशासक ने किसानों के हित पर ध्यान न देकर नेताओं के कहने पर उद्योगों को कर्ज दिए। इससे जिले का सहकारी क्षेत्र टूट गया और निजीकरण बढ़ा है। सहकारिता को बचाने के लिए हम सब एक साथ आकर यह चुनाव लड़ेंगे।" उन्होंने 'बाड़ ही खेत खा गई' यानी बाड़ ने ही खेत खा लिया, ऐसी बात भी कही।
अपने अध्यक्षीय कार्यकाल का ब्योरा देते हुए रणजितसिंह ने कहा, "2005 में मैं बैंक का चेयरमैन बना, तब बैंक के पास रिजर्व बैंक का लाइसेंस नहीं था। उसे हासिल करने के लिए मैंने कोशिश की। मेरे चेयरमैन बनने से पहले बैंक के पास 1503 करोड़ रुपये की जमा थी। मेरे कार्यकाल में वह बढ़कर 2962 करोड़ रुपये हो गई।"
उन्होंने आगे कहा, "मैंने डीसीसी बैंक को ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाया। किसानों को बड़े पैमाने पर कर्ज बांटा। ट्रैक्टर खरीदने और घरों के लिए कर्ज देना शुरू किया। पंढरपुर में केशरमाती प्रदर्शनी लगाई और ढाई लाख किसानों का बीमा कराया।"
"मेरे कार्यकाल से पहले बैंक का निवेश 412 करोड़ रुपये था। उसे बढ़ाकर 1,210 करोड़ रुपये तक ले गया। मेरे चेयरमैन बनने से पहले किसानों को 1,633 करोड़ रुपये के कर्ज दिए गए थे। मेरे कार्यकाल में यह रकम बढ़कर 2,155 करोड़ रुपये हो गई," यह भी उन्होंने बताया।
बैठक में वरिष्ठ नेता विजयसिंह मोहिते-पाटील, लक्ष्मणराव ढोबळे, धनाजी साठे, सांसद धैर्यशील मोहिते-पाटील, वसंतनाना देशमुख, शिवानंद पाटील, सवितादेवी राजे भोसले, देवानंद बागल, भारत शिंदे, दत्तात्रय मगर, देवानंद गुंड-पाटील, बाळासाहेब पाटील, अनिकेत देशमुख, अनिरुद्ध कांबळे, विश्वास बारबोले, प्रथमेश म्हेत्रे, महेश तळेकर और दशरथ कांबळे मौजूद थे। इनके साथ सोलापुर जिले की हर तहसील से आए सैकड़ों कार्यकर्ता भी थे।
शिवरत्न बंगला, अकलूज मोहिते-पाटील परिवार का निवास है। बैठक का मकसद माढा लोकसभा क्षेत्र में महायुति के भीतर चल रहे विवाद का हल निकालना और 2026 के चुनाव थे। धैर्यशील मोहिते-पाटील को 2024 में NCP (SP) से उम्मीदवारी मिली और वे शरद पवार गुट में गए, जबकि रणजितसिंह भाजपा में ही रहे। विजयसिंह मोहिते-पाटील उनके पिता हैं। वे पूर्व उपमुख्यमंत्री और माढा के पूर्व सांसद हैं और शरद पवार के करीबी हैं।
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