सितंबर में सोने की आयात 81.27 प्रतिशत और चांदी की 49.11 प्रतिशत गिरी
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2026 में सोने-चांदी की आयात सालाना आधार पर तेजी से घटी, जबकि देश की कुल आयात और निर्यात बढ़ी।
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वाणिज्य मंत्रालय ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उनके मुताबिक सितंबर 2026 में देश में सोने की आयात सालाना आधार पर 81.27 प्रतिशत गिर गई। चांदी की आयात में भी 49.11 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। भारत में सोने और चांदी की आयात के रुझान में इस वक्त बड़ा बदलाव दिख रहा है।
इस गिरावट की वजह पश्चिम एशिया के संकट से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बना दबाव और देश की विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिशें मानी जा रही हैं।
इसी साल, यानी मई 2026 में, सरकार ने सोने और चांदी समेत सभी प्रमुख कीमती धातुओं पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से सीधे 15 प्रतिशत कर दिया था। इससे बाहर से आने वाला सोना और चांदी महंगा हो गया, और उसका सीधा असर देश के अंदर की मांग पर पड़ा। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव से जो आर्थिक अनिश्चितता बनी है, उसमें ग्राहकों और व्यापारियों ने भी सावधानी बरती है।
चालू वित्त वर्ष में, यानी अप्रैल से सितंबर 2026-27 के बीच, सोने की आयात 27.32 प्रतिशत घटकर 19.27 अरब डॉलर पर आ गई। चांदी की आयात 25.17 प्रतिशत घटकर 2.4 अरब डॉलर रह गई। भारत के सोने के आयात में स्विट्जरलैंड का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत है और वह सबसे बड़ा सप्लायर देश है। उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और दक्षिण अफ्रीका का नंबर आता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के संकट से पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए देशवासियों से फिलहाल सोने की खरीद टालने की अपील की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि बहुत ज्यादा जरूरत हो, तभी खरीदारी करें। भारत अपनी कुल सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, और इसमें देश की विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा खर्च होता है। विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और चालू खाता घाटे (CAD) को काबू में रखने के लिहाज से इस आयात का घटना देश के व्यापक आर्थिक हित के लिए अहम साबित हो रहा है।
कीमती धातुओं की आयात भले घटी हो, देश की कुल मर्चेंडाइज आयात और निर्यात का ग्राफ ऊपर गया है। सितंबर 2026 में देश की कुल आयात 74.61 अरब डॉलर पर पहुंची, जो पिछले साल इसी महीने में 69.08 अरब डॉलर थी। दूसरी तरफ निर्यात 36.08 अरब डॉलर से बढ़कर 44.40 अरब डॉलर हो गया। मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक सामान, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और खेती की उपज के जोरदार निर्यात से देश की व्यापारी स्थिति मजबूत रही है।
आयात घटने का मतलब यह नहीं कि ग्राहकों के लिए सोना-चांदी सस्ता हो जाएगा। देश में सोने-चांदी के खुदरा दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव, रुपया-डॉलर विनिमय दर और बढ़े हुए आयात शुल्क पर निर्भर करते हैं। जानकारों के मुताबिक आने वाले त्योहारों और शादियों के मौसम में देश के अंदर मांग कैसी रहती है, इसी पर आगे का व्यापार और आयात की तस्वीर टिकी होगी।