सोना-चांदी नहीं, अब तांबे ने पकड़ी रिकॉर्ड तेजी की रफ्तार
लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबे के भाव ऑल टाइम हाई पर पहुंचे, जानिए वजह
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ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में इन दिनों सोने-चांदी के साथ-साथ एक और धातु की खूब चर्चा हो रही है, और वो है तांबा यानी कॉपर। लंदन मेटल एक्सचेंज यानी LME पर कॉपर के दाम अभी तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं।
इसके पीछे तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पहला, अमेरिका आयात शुल्क यानी टैरिफ बढ़ा सकता है, इस डर से व्यापारियों ने रिफाइंड कॉपर की बड़ी खेप अमेरिका भेज दी, जिससे LME के गोदामों में स्टॉक तेजी से घट गया। दूसरा, दुनियाभर में खदानों से होने वाली सप्लाई कम हुई है, जिससे मांग और पूर्ति में बड़ा अंतर आ गया है। तीसरा, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग ने भी कॉपर की खपत को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
आंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो LME पर तीन महीने का कॉपर बेंचमार्क 14,500 से 14,600 डॉलर प्रति मेट्रिक टन के पार निकल गया है। जानकारों का मानना है कि सप्लाई में लगातार आ रही रुकावटों की वजह से कॉपर जल्द ही 15,000 डॉलर प्रति मेट्रिक टन का लेवल भी छू सकता है।
वहीं देश के भीतर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोना 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.40 लाख रुपये प्रति किलो के आंकड़े को पार कर चुकी है। इसी एक्सचेंज पर कॉपर फिलहाल 1,387 से 1,388 रुपये प्रति किलो के आसपास ट्रेड कर रहा है। रुपये में मजबूती की वजह से भारतीय बाजार में कॉपर के दाम अभी थोड़े स्थिर नजर आ रहे हैं, लेकिन लंबे समय के लिए इसका आउटलुक बेहद मजबूत माना जा रहा है।
इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी, डिफेंस सेक्टर के साथ-साथ AI डेटा सेंटर्स और पावर ग्रिड्स के विस्तार के लिए तांबे की मांग में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है, और यही टेक्निकल ग्रोथ इसकी कीमतों को आगे भी सपोर्ट कर सकती है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक साल के बचे हुए महीनों में भी कॉपर की तेजी बनी रह सकती है। टेक्निकल चार्ट पर कीमतें अहम मूविंग एवरेज से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे कुछ समय के लिए दाम स्थिर होने यानी कंसोलिडेशन के बाद फिर से बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है।