सीबीडी के वारकरी भवन में नॉनवेज और शराब की शिकायतें, विनय मोरे ने की जांच की मांग
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सारथी सुरक्षा सेवा संस्था के महासचिव विनय मोरे ने मुख्यमंत्री को निवेदन भेजकर नाम बदलने या सख्त नियमावली की मांग की है।
सीबीडी बेलापुर के स्वामी विवेकानंद नगर इलाके में नवी मुंबई महानगरपालिका के वारकरी भवन के इस्तेमाल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता और सारथी सुरक्षा सेवा संस्था के महासचिव विनय मोरे ने सीधे मुख्यमंत्री को निवेदन भेजा है। उसमें मांग की गई है कि भवन के नाम पर या तो दोबारा विचार हो, या इस हॉल के इस्तेमाल के लिए सख्त नियमावली लागू की जाए।
निवेदन के मुताबिक इस हॉल में मांसाहारी भोजन के कार्यक्रम होने की शिकायतें हैं। इसके अलावा 30 तारीख को हुए एक कार्यक्रम में कथित तौर पर शराब पी जाने की चर्चा है। मोरे चाहते हैं कि इन दोनों बातों की निष्पक्ष जांच हो।
स्वामी विवेकानंद नगर यानी सीबीडी के इस वारकरी भवन के पीछे की तरफ भगवान शंकर का मंदिर है। निवेदन में कहा गया है कि इसलिए हॉल के कार्यक्रमों में मंदिर की पवित्रता, इलाके की साफ-सफाई और लोगों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना जरूरी है।
मोरे का कहना है कि वारकरी संप्रदाय भक्ति, शाकाहार, संयम और सात्विक जीवनशैली से जुड़ा है। ऐसे में जिस हॉल का नाम "वारकरी भवन" है, वहां मांसाहारी भोजन के कार्यक्रम होने की शिकायतों से वारकरी संप्रदाय के नाम को लेकर गलतफहमी पैदा हो सकती है। इसलिए उन्होंने सुझाव दिया है कि हॉल को भारतरत्न डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का नाम दिया जाए, या सर्वधर्मसमभाव, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय एकात्मता को दर्शाने वाला कोई और नाम तय किया जाए। अगर वारकरी भवन नाम ही रखना है, तो उसके अनुरूप इस्तेमाल की नियमावली और साफ पाबंदियां लगाई जाएं।
30 तारीख को यह हॉल बुक किया गया था। निवेदन में दावा है कि उस कार्यक्रम में मांसाहारी खाने के साथ शराब भी चली, ऐसी चर्चा सीबीडी इलाके में चल रही है। इस चर्चा की सच्चाई परखने के लिए मांग की गई है कि महानगरपालिका हॉल का बुकिंग रजिस्टर, आयोजकों की जानकारी, इजाजत की शर्तें और कार्यक्रम के इंतजाम की जांच करे। साथ ही पुलिस विभाग और राज्य उत्पाद शुल्क विभाग से जरूरी जानकारी लेकर आधिकारिक तौर पर पता किया जाए कि शराब पी गई थी या नहीं। नियम के खिलाफ कुछ मिले तो संबंधित आयोजकों पर कानूनी कार्रवाई की जाए, यह मांग भी की गई है।
मोरे ने एक और मुद्दा उठाया है। उनके मुताबिक हॉल का कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी मंडप वालों और कैटरर्स का सामान इलाके में पड़ा रहता है। इससे सार्वजनिक जगह पर अतिक्रमण होता है और इलाके की सफाई और सुंदरता पर असर पड़ता है।
निवेदन में आरोप है कि इस मामले में बार-बार शिकायतें करने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए संबंधित महानगरपालिका अधिकारियों और कर्मचारियों के कामकाज की भी जांच की मांग की गई है। यह भी जांचने को कहा गया है कि आयोजक को नियमों के खिलाफ छूट तो नहीं दी जा रही।
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