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शोर की शिकायत का रिकॉर्ड नहीं रखा, आंबाझरी के इंस्पेक्टर को फटकार, बीट मार्शल पर जुर्माना

शोर की शिकायत का रिकॉर्ड नहीं रखा, आंबाझरी के इंस्पेक्टर को फटकार, बीट मार्शल पर जुर्माना तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

नागपुर पुलिस कमिश्नर ने आंबाझरी के पुलिस इंस्पेक्टर को फटकारा और बीट मार्शल पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया। हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में पुलिस के हलफनामों से यह बात सामने आई।

ध्वनि प्रदूषण की एक शिकायत पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड न रखना आंबाझरी के पुलिस इंस्पेक्टर को भारी पड़ गया। नागपुर के पुलिस कमिश्नर ने इंस्पेक्टर को फटकार लगाई है और कार्रवाई दर्ज न करने पर एक बीट मार्शल पर 500 रुपये का जुर्माना ठोका है।

यह चूक मंगलवार को सामने आई, जब शहर पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में हलफनामे दाखिल किए। ये हलफनामे ध्वनि प्रदूषण, गैरकानूनी पटाखों के इस्तेमाल और गाड़ियों के मॉडिफाइड साइलेंसर से जुड़ी कई जनहित याचिकाओं में दिए गए थे।

हाईकोर्ट ने आंबाझरी के पुलिस इंस्पेक्टर से अलग हलफनामा मांगा था। उन्हें बताना था कि 11 अक्टूबर को नॉइज़ फ्री नागपुर पोर्टल पर आई एक शिकायत को कैसे निपटाया गया। बताया गया है कि शिकायत एक कंस्ट्रक्शन साइट से आ रहे बहुत ज्यादा शोर को लेकर थी। की गई कार्रवाई का ठीक से रिकॉर्ड नहीं रखा गया, इसलिए कोर्ट को दखल देना पड़ा और पुलिस महकमे के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई।

पुलिस कमिश्नर की ओर से हलफनामा विशेष शाखा के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस संदीप पाखले ने दाखिल किया। यह हाईकोर्ट के 30 अक्टूबर के आदेश के जवाब में था। कोर्ट ने कई उल्लंघनों पर ब्योरा मांगा था, जिनमें सड़कों पर पटाखे फोड़ना, 55 डेसिबल की तय सीमा से ज्यादा आवाज वाले पटाखों का इस्तेमाल, गैरकानूनी मॉडिफाइड साइलेंसर और पटाखा विक्रेताओं को लाइसेंस देने की व्यवस्था शामिल हैं।

पटाखों के प्रदूषण पर पुलिस ने कोर्ट को बताया कि 15 सितंबर को जारी सार्वजनिक नोटिस में विक्रेताओं, दुकानदारों और थोक व्यापारियों से कहा गया था कि वे सिर्फ ग्रीन पटाखे बेचें। यह निर्देश राष्ट्रीय हरित अधिकरण के 9 नवंबर 2020 के आदेश और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पत्र पर आधारित है। बोर्ड ने नागपुर को मध्यम वायु प्रदूषण वाले शहरों में रखा है।

अस्थायी पटाखा लाइसेंस पर भी पुलिस ने सख्ती बढ़ाई है। सीताबर्डी मेन रोड, महाल चौक, मेयो अस्पताल इलाके और गोकुलपेठ मार्केट जैसी भीड़भाड़ वाली और संवेदनशील जगहों पर ऐसे लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे। पटाखों की लड़ियों की बिक्री और इस्तेमाल पर भी रोक है। हलफनामे के मुताबिक लाइसेंस धारकों को शर्त नंबर 15 के तहत सुप्रीम कोर्ट के निर्देश मानने के लिए बाध्य किया गया है।

इन पाबंदियों के बावजूद उल्लंघन होते रहे। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि लाइसेंस की शर्तें तोड़ने पर 10 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। जागरूकता के लिए महकमे ने करीब 363 कार्यक्रम किए हैं। लोग उल्लंघन की शिकायत पुलिस कंट्रोल रूम की चौबीसों घंटे चलने वाली हेल्पलाइन 9823300100 पर कर सकते हैं। पटाखों के जायज इस्तेमाल और पाबंदियों के संदेश सोशल मीडिया ग्रुपों में भी भेजे गए हैं।

अलग हलफनामे में ट्रैफिक के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस आदित्य मिरखेलकर ने अवैध रूप से मॉडिफाइड साइलेंसर वाली गाड़ियों पर हुई कार्रवाई बताई। ऐसे साइलेंसर शहर की सड़कों पर शोर बढ़ाते हैं। हलफनामे के अनुसार सितंबर और अक्टूबर में सिविल लाइंस इलाके की घटनाओं को लेकर सदर पुलिस स्टेशन में छह मामले दर्ज हुए। ये मामले पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 और 15 के तहत दर्ज हैं।

ट्रैफिक पुलिस ने 1 जनवरी से 5 सितंबर के बीच जब्त किए गए 372 मॉडिफाइड साइलेंसर नष्ट किए। इन्हें 5 सितंबर को रोड रोलर के नीचे कुचला गया, ताकि जब्त सामान दोबारा गाड़ियों में न लगाया जा सके। मिरखेलकर ने कहा, "अनधिकृत मॉडिफाइड साइलेंसर को बेकार करने और गाड़ियों में उनका दोबारा इस्तेमाल या फिटिंग रोकने के लिए उन्हें नष्ट किया गया।"

इन हलफनामों से शहर की कार्रवाई की मशीनरी अब अदालत की निगरानी में है। हाईकोर्ट ने रोकथाम के उपायों, जमीनी कार्रवाई और जवाबदेही का ठोस ब्योरा मांगा है। आंबाझरी की शिकायत पर हुई कार्रवाई से यह भी साफ है कि रिकॉर्ड ठीक से रखना जरूरी है और जनता की शिकायतें अनसुनी या बिना दर्ज किए नहीं रहनी चाहिए।

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