शेयर मार्केट के पैसों से खरीदा घर, अरुण कदम की पत्नी वैशाली ने सुनाया शिफ्टिंग का किस्सा
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वैशाली कदम ने एक इंटरव्यू में बताया कि खार का नया घर उन्होंने शेयर मार्केट की कमाई से लिया और अरुण कदम आखिर में परिवार के साथ आ गए।
मराठी इंडस्ट्री में अरुण कदम का नाम सब जानते हैं। कॉमेडी हो या सीरियस रोल, उन्होंने हमेशा लोगों को हंसाया है। लेकिन काम से ज्यादा वो अपनी असल जिंदगी की वजह से चर्चा में रहते हैं। उनकी पत्नी वैशाली कदम फिल्मों में काम नहीं करतीं, फिर भी सोशल मीडिया पर काफी मशहूर हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने नए घर का मजेदार किस्सा सुनाया।
वैशाली ने बताया कि पहले वो पूरे समय हाउस वाइफ थीं। घर बैठे भी वो शेयर मार्केट देखती रहती थीं। थोड़े-थोड़े पैसे लगाती गईं और उससे अच्छा मुनाफा मिला। धीरे-धीरे और पैसे लगाने का मन हुआ। खार में जो घर लिया गया, वो इसी पैसे से लिया है। उसमें आधे पैसे अरुण के थे और आधे उनके।
वो लोग पहले खार के ईस्ट में रहते थे। वैशाली का वहां मन नहीं लगता था। उन्हें हमेशा लगता था कि आगे बढ़ना चाहिए और बड़ा घर लेना चाहिए। अरुण की दिक्कत अलग थी। उनकी मां पास में ही रहती थीं, इसलिए वो कहते थे कि मैं मां को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा।
वैशाली के मुताबिक उन्होंने अरुण को बहुत समझाया। उन्होंने कहा कि घरों के भाव रोज बढ़ रहे हैं, अभी नहीं लिया तो बाद में लेना मुश्किल हो जाएगा और इन्वेस्ट करने का यही सही वक्त है। उनकी एक सहेली भी बार-बार कहती थी कि तू वहां से बाहर निकल, अभी कदम नहीं उठाया तो जिंदगी में कुछ नहीं होगा। फिर भी अरुण किसी हाल में सुनने को तैयार नहीं थे। वो अपने फैसले पर अड़े रहे।
तब वैशाली ने सोचा कि ये नहीं आ रहे तो मैं अकेली चली जाती हूं। उन्होंने खुद जाकर किराए का घर ढूंढा और वहां रहने चली गईं। सारा घर उन्होंने अकेले देखा था। बेटी सुकन्या तब बड़ी हो चुकी थी और हमेशा मां के साथ रहती थी। वैशाली ने उसे बताया कि वो ऐसा फैसला ले रही हैं। सुकन्या बोली, मां, आप जो कह रही हो वो सही है तो कर लो, लेकिन पापा का क्या? वैशाली ने कहा, देखते हैं क्या होता है। उन्होंने बेटी को नया घर भी दिखा दिया। सारे कागजात और पूरा व्यवहार उन्होंने अकेले संभाला।
सहेली ने उन्हें आइडिया दिया था कि पहले किराए पर वहां रहने जाओ, तभी आसपास के अच्छे घरों की जानकारी मिलती है। इसीलिए वो घर से निकलीं। उस वक्त उनके पास थोड़े ज्यादा पैसे थे, इसलिए उन्होंने अरुण से ज्यादा पूछा भी नहीं। हंसते हुए वो बोलीं कि तब वो सक्षम थीं, पर अरुण भी अपनी बात पर टिके थे कि मैं मां को नहीं छोडूंगा।
फिर वैशाली और सुकन्या ने मिलकर ट्रक बुलाया और सामान भरना शुरू किया। अरुण तब एक कोने में रूठकर बैठे थे। उन्होंने तय कर लिया था कि कुछ भी हो जाए, मैं इस घर से नहीं जाऊंगा।
वैशाली ने आगे बताया कि उन्होंने अरुण से साफ कह दिया, ठीक है, तू यहीं रह। उन्होंने अपनी गृहस्थी और अपनी जरूरत की सारी चीजें पैक कर लीं, पर जानबूझकर अरुण के कपड़ों को हाथ नहीं लगाया।
सारा सामान बाहर निकल जाने के बाद आखिरी बैग उठाते हुए उन्होंने पूछा कि अब तू क्या करेगा। तब अरुण बच्चे की तरह रूठकर बोले, "मेरी भी बैग भर!" यानी मेरी भी बैग भर दो। बीवी और बेटी के बिना वो अकेले कैसे रहते? आखिर वो आने को तैयार हो गए। बिल्कुल आखिरी पल में वैशाली ने उनके कपड़े भरे। अरुण ने कोई मदद नहीं की। प्रोग्रामों में मिली शालों में उन्होंने अरुण के सारे कपड़े बांधे और सब नए घर के लिए निकल पड़े।
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