सौदी की मुख्य तेल पाइपलाइन बंद, कच्चा तेल 107 डॉलर के पार, भारत पर असर की आशंका
मिडिल ईस्ट में चल रहे सैन्य तनाव का असर अब पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी की वजह से होर्मुझ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पहले से ही लगभग बंद जैसी हालत में है। अब सौदी अरब की ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन (East-West Crude Oil Pipeline) पर हुए एक बड़े ड्रोन हमले के बाद इस पाइपलाइन को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा है।
यह पाइपलाइन होर्मुझ के रास्ते के अलावा सौदी अरब के पास मौजूद इकलौता बड़ा विकल्प है, और इसकी लंबाई 1,200 किलोमीटर है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल मच गई है।
यह पाइपलाइन अरब प्रायद्वीप से होते हुए लाल सागर के पास स्थित यान्बू बंदरगाह तक हर दिन करीब 4 से 5 दशलक्ष बैरल कच्चा तेल पहुंचाती है। यह मात्रा दुनिया की कुल रोजाना तेल आपूर्ति का करीब 4 से 5 प्रतिशत है। होर्मुझ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही रुकी हुई थी, तब सौदी अरब इसी रास्ते से अपना निर्यात चालू रखे हुए था। लेकिन इराक में ईरान समर्थक गुटों के ड्रोन हमले में पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशन को भारी नुकसान पहुंचा है, और इस व्यवस्था को दोबारा चालू होने में कई हफ्ते लग सकते हैं, ऐसा बताया जा रहा है।
पाइपलाइन बंद होने से सौदी अरब के यान्बू बंदरगाह पर मौजूद रिजर्व तेल भंडार पर भारी दबाव आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बंदरगाह पर उपलब्ध भंडार सिर्फ 5 से 7 दिन के निर्यात के लिए ही पर्याप्त है। सौदी अरब भले ही इजिप्ट में मौजूद अपने अतिरिक्त भंडार से फिलहाल काम चला रहा हो, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति में रुकावट को यह भंडार संभाल नहीं पाएगा।
खास बात यह है कि यह संकट ऐसे समय आया है जब सौदी अरब पहले से ही अपना तेल उत्पादन काफी घटा चुका है। अगस्त महीने में सौदी का रोजाना उत्पादन 6.2 दशलक्ष बैरल रह गया था, जबकि फरवरी में यह 10.9 दशलक्ष बैरल था। उत्पादन में गिरावट और मुख्य निर्यात रास्ता बंद होने से ओपेक (OPEC+) देशों पर तेल आपूर्ति बढ़ाने का भारी दबाव बन गया है।
सौदी की पाइपलाइन बंद होने की खबर आते ही दुनियाभर के शेयर बाजार और ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत प्रति बैरल 107.81 डॉलर पर पहुंच गई, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (US WTI) क्रूड की कीमत 102.94 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुझ जलडमरूमध्य और लाल सागर में जहाजों की आवाजाही इसी तरह ठप रही, तो आने वाले दिनों में कच्चा तेल 120 से 125 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकता है।
भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेश से मंगाता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 1 डॉलर भी बढ़े, तो भारत का आयात बिल हजारों करोड़ रुपये बढ़ जाता है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 105 से 110 डॉलर के ऊपर लंबे समय तक बने रहे, तो भारतीय तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का भारी दबाव आएगा। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम प्रति लीटर 5 से 8 रुपये तक बढ़ सकते हैं। डीजल महंगा होने से मालढुलाई महंगी होगी, जिसका सीधा असर सब्जी, दूध, अनाज और रोजमर्रा के सामान के दामों पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ेगी। एयरलाइन कंपनियों के लिए विमान ईंधन (ATF) महंगा होने से हवाई सफर के टिकट के दाम भी बढ़ेंगे। साथ ही भारत का आयात बिल बढ़ने से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया और कमजोर हो सकता है।
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