सौदी अरेबिया की तेल पाइपलाइन पर हमला, भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका
मध्य पूर्व में तनाव के बीच सौदी अरेबिया की एक अहम पाइपलाइन के पास पंपिंग स्टेशन पर मिसाइल हमले की खबर, कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सौदी अरेबिया की तेल सुविधाओं को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक सौदी अरेबिया की एक अहम इंधन पाइपलाइन के पास बने पंपिंग स्टेशन पर मिसाइलों से हमला किया गया है। इसका बड़ा असर कच्चे तेल पर पड़ने वाला है और भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों पर भी इसका सीधा असर होने की बात कही जा रही है।
सौदी अरेबिया में हुई इस घटना की अभी तक सार्वजनिक रूप से पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक शुरुआती आकलन में पाइपलाइन की कुछ पंपिंग सुविधाओं को नुकसान पहुंचा हो सकता है। सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों ने भी इस घटना को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को ली गई तस्वीरों में एक जगह आग से भारी नुकसान होते दिखा, जबकि एक दिन पहले दूसरी जगह से काले धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। इससे यह मामला काफी गंभीर बताया जा रहा है।
यह हमला भले ही एक जगह हुआ हो, लेकिन इसकी अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि सौदी अरेबिया की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन इस वक्त देश के लिए बेहद अहम भूमिका निभा रही है। ईरान के साथ चल रहे टकराव की वजह से इस इलाके में समुद्री रास्ते से तेल की ढुलाई पर खतरा बढ़ गया है, और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है। ऐसे हालात में सौदी अरेबिया ने फारस की खाड़ी से सीधे टैंकर में भेजने के बजाय बड़ी मात्रा में कच्चा तेल अपनी पाइपलाइन के जरिए लाल सागर के यानबू बंदरगाह भेजना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस वैकल्पिक रास्ते से हर दिन करीब 50 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा है।
अगर पाइपलाइन या उससे जुड़ी पंपिंग सुविधाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा, तो सौदी अरेबिया के तेल आपूर्ति तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि पाइपलाइन को कितना सीधा नुकसान हुआ है और उसकी मरम्मत में कितना वक्त लगेगा, यह अभी साफ नहीं हो पाया है। इस हमले के लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी भी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि वे इस घटना से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटा रहे हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों में पाइपलाइन के आसपास कई जगहों पर आग लगने की बात सामने आई है, लेकिन इनमें से कुछ जगहें आपातकालीन हालात में तेल या गैस जलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्लेयर पिट्स भी हो सकती हैं, इसलिए हर आग को हमले से जोड़ना गलत होगा। यही वजह है कि इस पूरे मामले को पूरी तरह समझने में अभी वक्त लग सकता है।
इस बीच कच्चे तेल के दामों पर भी असर दिखने लगा है। मध्य पूर्व से सप्लाई रुकने की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें प्रति बैरल 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। अगर यह तनाव लंबा खिंचा और इसका असर तेल के उत्पादन या ढुलाई पर और बढ़ा, तो कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसका असर तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है, क्योंकि कच्चे तेल के बढ़े दामों से आयात का खर्च, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
फिलहाल बाजार सौदी की तेल सुविधाओं को हुए असली नुकसान, मरम्मत की स्थिति और इलाके में आगे होने वाली सैन्य हलचल पर बारीकी से नजर रखे हुए है। अगर सप्लाई के रास्ते सुरक्षित रहे तो बाजार पर दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन किसी और अहम तेल सुविधा पर हमला हुआ तो वैश्विक इंधन बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।