संजय राऊत का दावा: संघ और भाजपा में गहरे मतभेद, संघ भी चाहता है सत्ता परिवर्तन
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राऊत ने कहा है कि संघ और भाजपा के बीच मतभेद गहरे हो गए हैं और संघ परिवार भी रिजीम चेंज चाहता है।
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मुंबई: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राऊत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रिश्तों को लेकर बड़ा दावा किया है। राऊत के मुताबिक दोनों के बीच मतभेद काफी गहरे हो गए हैं और संघ परिवार भी रिजीम चेंज, यानी सत्ता परिवर्तन चाहता है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई अटकलें शुरू हो गई हैं।
राऊत ने यह बात अपनी पार्टी के मुखपत्र में लिखे एक लेख में कही है। लेख में उन्होंने नागपुर में हुए RSS के विजयादशमी समारोह का मुद्दा उठाया। इस समारोह में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया था। राऊत ने इस पूरे घटनाक्रम को केंद्र सरकार और संघ के रिश्तों के संदर्भ में देखा है।
राऊत ने धनखड़ को मुख्य अतिथि बनाए जाने को राजनीतिक नज़र से अहम बताया। उनका दावा है कि केंद्र सरकार ने धनखड़ को नज़रअंदाज़ किया, और ऐसे में उन्हें संघ के मंच पर बड़ी जगह मिलना एक संदेश हो सकता है।
राऊत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि सरकार ने पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ की उपेक्षा की। राऊत के मुताबिक पद छोड़ने के बाद धनखड़ को आवास, दफ्तर की मदद और पेंशन जैसी सुविधाएं नहीं मिलीं, और उन्हें एक दोस्त के फार्म हाउस पर रहना पड़ रहा है।
धनखड़ ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले उपराष्ट्रपति का पद छोड़ दिया था। इसी बात का हवाला देकर राऊत ने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति को RSS के विजयादशमी समारोह में मुख्य अतिथि बनाना क्या किसी राजनीतिक इशारे की तरफ़ नहीं है।
अपने लेख में राऊत ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में मूल्यहीन और भ्रष्ट सरकार सत्ता में है। उनका दावा है कि जनता इस सरकार को हटाना चाहती है और परदे के पीछे RSS भी यही चाहता है। राऊत के मुताबिक संघ का कथित रिजीम चेंज एजेंडा जगदीप धनखड़ के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है।
यह राऊत का अपना राजनीतिक आकलन है। संघ की तरफ़ से धनखड़ को बुलाने के पीछे सत्ता परिवर्तन की कोई मंशा घोषित किए जाने की जानकारी नहीं है। RSS और भाजपा के बीच मतभेद या सत्ता बदलने की किसी योजना पर संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि भी सामने नहीं आई है।
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