सह्याद्रि साखर कारखाने की पेराई की तैयारी पूरी, रोज 11 हजार मेट्रिक टन का लक्ष्य
कराड तालुका के यशवंतनगर का सह्याद्रि सहकारी साखर कारखाना 2026-27 के पेराई सीजन के लिए तैयार है। पिछले सीजन में क्षमता 7500 से बढ़कर 11 हजार मेट्रिक टन प्रतिदिन हो गई थी।
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मसूर: कराड तालुका के यशवंतनगर में चलने वाले सह्याद्रि सहकारी साखर कारखाने ने पिछले सीजन में अपनी पेराई क्षमता बढ़ाने में कामयाबी पाई। रोज की क्षमता 7500 मेट्रिक टन से बढ़कर 11 हजार मेट्रिक टन तक पहुंच गई। विस्तार की वजह से कारखाने की कार्यक्षमता काफी बढ़ी है और इसका फायदा गन्ना उगाने वाले किसानों को मिलेगा।
कारखाने का काम देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री स्व. यशवंतराव चव्हाण की प्रेरणा और संस्थापक आदरणीय पी. डी. पाटील के विचारों पर चल रहा है। सहकार के मूल्यों की यह विरासत संभालते हुए कारखाना आगे बढ़ रहा है। राज्य के पूर्व सहकार और पणन मंत्री बाळासाहेब पाटील कारखाने के चेयरमैन हैं। उनके मार्गदर्शन में कारखाने ने 2026-27 के पेराई सीजन के लिए जोरदार तैयारी की है।
चालू सीजन 2026-27 में रोज 11 हजार मेट्रिक टन या उससे भी ज्यादा गन्ने की पेराई हो सके, इस हिसाब से गन्ना कटाई और ढुलाई का इंतजाम खड़ा किया गया है। सीजन बिना रुकावट चले, इसके लिए जो भी तैयारी चाहिए थी, कारखाना प्रशासन ने पूरी कर ली है। इस बीच कटाई और ढुलाई की टोलियां कारखाना स्थल पर और खेती विभाग के क्षेत्रीय दफ्तरों के तहत आने वाले अलग अलग गांवों में पहुंचना शुरू हो गई हैं। इस तरह कारखाना पेराई सीजन के लिए हर तरह से तैयार है।
कारखाना स्थल पर पहुंची कटाई और ढुलाई की टोलियों को उनके अपने क्षेत्रीय दफ्तर के तहत बैठाने का काम चल रहा था। उस वक्त यशवंतनगर क्षेत्रीय दफ्तर के प्रमुख वाय. पी. साबळे, फील्डमैन एम. एच. मोरे और फील्डमैन एस. वाय. पवार मौजूद थे। उनके साथ संजय चव्हाण, डी. जी. सरगडे, राजेंद्र चव्हाण, राजेंद्र पाटील, वायदंडे और आतकरे वगैरह भी थे।
सह्याद्रि कारखाने की आम सभा की परंपरा अच्छी रही है। इस बार सालाना सभा सितंबर महीने में हुई थी। पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार को श्रद्धांजलि का प्रस्ताव पढ़ा जा रहा था, तभी विरोधियों ने हंगामा शुरू कर दिया। सभा में सवाल होते हैं और जवाब हम देते हैं, लेकिन विरोधियों ने सभा को बाजार बना दिया। इस हंगामे के बीच भी सह्याद्रि के सभासदों ने संयम रखा।
कहा गया कि विरोधियों को अपने सवालों के जवाब सुनने ही नहीं थे। उन्हें तो बस नाम की तरह ऊंचे चल रहे सह्याद्रि कारखाने पर टीका करनी थी। अलग से सभा करके भड़काऊ भाषण दिए जाते हैं और कई बड़े बड़े दावे किए जाते हैं। इन सब का जवाब सही वक्त पर दिया जाएगा।