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09:13 IST

राज्यपाल वर्मा बोले, बैंक सिर्फ कर्ज देने वाले नहीं, राष्ट्रनिर्माण में भी साझीदार हैं

मुंबई में असोचैम के बैंकिंग सम्मेलन में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने वित्तीय संस्थाओं से महिलाओं, MSME और स्टार्टअप्स का साथ देने को कहा।

राज्यपाल वर्मा बोले, बैंक सिर्फ कर्ज देने वाले नहीं, राष्ट्रनिर्माण में भी साझीदार हैं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई: महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि बैंक और वित्तीय संस्थाएं सिर्फ कर्ज बांटने तक सीमित नहीं हैं। देश के आर्थिक विकास और राष्ट्रनिर्माण में उनकी अहम भूमिका है। रोजगार पैदा करने, उद्योगों को पैसे का सहारा देने और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में उनका योगदान निर्णायक है। वर्मा के मुताबिक विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पाने के लिए वित्तीय क्षेत्र को बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।

राज्यपाल मुंबई के वरली में फोर सीजन्स होटल में असोचैम की तरफ से हुए 21वें वार्षिक बैंकिंग व वित्तीय क्षेत्र सम्मेलन और पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे। सम्मेलन का विषय था "रेजिलिएंस, रीइन्वेंशन एंड इंडियाज राइज"। बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र के मान्यवर, उद्योग के प्रतिनिधि और नीति बनाने वाले लोग इसमें मौजूद थे।

वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री जनधन योजना, आधार पर आधारित सेवाएं, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और UPI की वजह से देश में पैसों का लेनदेन ज्यादा आसान और पारदर्शी हो गया है। इससे करोड़ों लोग औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ पाए हैं।

उन्होंने साफ किया कि वित्तीय समावेशन का मतलब सिर्फ बैंक खाता खोलना या डिजिटल पेमेंट करना नहीं है। गांव के परिवारों, गरीबों और छोटे कारोबारियों को सस्ता कर्ज, बीमा और पेंशन जैसी सेवाएं भी आसानी से मिलनी चाहिए।

त्रिपुरा के वित्त मंत्री रहते हुए अपना तजुर्बा बताते हुए वर्मा ने महिला बचत समूहों की आर्थिक ताकत का जिक्र किया। शुरू में बैंकों को इन समूहों को कर्ज देने में शक था। लेकिन जब कर्ज मिलना शुरू हुआ तो उन्होंने देखा कि महिलाओं ने कर्ज चुकाने में अनुशासन दिखाया। इसी वजह से उन्होंने वित्तीय संस्थाओं से अपील की कि वे महिलाओं की क्षमता पर भरोसा करें और उन्हें ज्यादा मौके दें।

राज्यपाल ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग देश में बड़े पैमाने पर रोजगार बनाते हैं। फिर भी कई उद्योगों को वक्त पर और सस्ता कर्ज मिलने में दिक्कत आती है। वर्मा ने बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं से कहा कि वे इन उद्योगों के लिए नए तरह की फाइनेंसिंग योजनाएं बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में स्टार्टअप्स को कैपिटल, वर्किंग कैपिटल और लचीली कर्ज सुविधाएं देने का बड़ा मौका है।

डिजिटल बैंकिंग पर बोलते हुए राज्यपाल ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म से बैंकिंग सेवाएं ज्यादा कारगर हो रही हैं। मगर ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा, डेटा की गोपनीयता और शिकायतों के असरदार निपटारे की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए।

वर्मा ने अपील की कि सरकार, बैंक, वित्तीय संस्थाएं और टेक्नोलॉजी क्षेत्र मिलकर काम करें और ऐसी वित्तीय व्यवस्था खड़ी करें जिसमें सब शामिल हों। कार्यक्रम में राज्यपाल के हाथों बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाली संस्थाओं को पुरस्कार भी दिए गए।

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