तिरुपत्तूर में बिना इंजन 6 किलोमीटर दौड़े मालगाड़ी के 7 डिब्बे, बड़ा हादसा टला
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जोलारपेट्टई जंक्शन के यार्ड से निकले सात खाली डिब्बे थामलेरी मुथूर के पास पटरी से उतरे। गेटकीपर की सतर्कता से बड़ा हादसा टला, बेंगलुरु-चेन्नई रूट पर गाड़ियां लेट हुईं।
तमिलनाडु के तिरुपत्तूर जिले में रेलवे के सात खाली डिब्बे अचानक यार्ड से निकल पड़े और पटरी से उतर गए। जोलारपेट्टई रेलवे जंक्शन के यार्ड से ये डिब्बे बिना इंजन के करीब छह किलोमीटर तक दौड़ते चले गए। आखिर में थामलेरी मुथूर के पास बेंगलुरु-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग पर ये पटरी से उतर गए। इस घटना से रेल यातायात बिगड़ गया, लेकिन बड़ा हादसा थोड़े में टल गया।
मिली जानकारी के मुताबिक ये सातों खाली डिब्बे जोलारपेट्टई के कोच मेंटेनेंस यार्ड में मरम्मत के लिए रखे गए थे। एक इंजन की मदद से इन्हें आगे धकेला गया था। प्रारंभिक अंदाज़ा यह है कि इसके बाद रेलवे कर्मचारियों ने इन्हें ठीक से सुरक्षित नहीं किया। इसी वजह से डिब्बे अपने आप आगे सरकने लगे। यार्ड की हद पार करके वे मुख्य रेल मार्ग पर पहुंच गए और करीब छह किलोमीटर का फासला तय कर लिया।
थामलेरी मुथूर के पास जब डिब्बे पटरी से उतरे, तब ड्यूटी पर तैनात गेटकीपर को डिब्बों की अजीब आवाज़ सुनाई दी। उसने फौरन रेलवे अधिकारियों को इसकी खबर दी। जानकारी मिलते ही रेलवे प्रशासन ने बेंगलुरु की तरफ से जोलारपेट्टई आ रही गाड़ियों को रोकने के लिए ज़रूरी निर्देश दिए। इससे संभावित टक्कर टल गई और बड़ा रेल हादसा होने से बच गया।
घटना के बाद रेलवे कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे। मुख्य रेल मार्ग की पटरियों से डिब्बे हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया। जुड़े हुए डिब्बों को अलग करने के लिए गैस कटिंग उपकरणों का इस्तेमाल हुआ। साथ ही जेसीबी मशीनों की मदद से भी डिब्बे पटरी से हटाए गए। इस घटना का असर बेंगलुरु-चेन्नई रूट की कई रेल गाड़ियों पर पड़ा और मुसाफिरों को देरी झेलनी पड़ी।
जोलारपेट्टई रेलवे जंक्शन दक्षिण भारत का एक अहम रेलवे केंद्र है। यहां 16 रेल ट्रैक हैं और बताया जाता है कि इसकी पहचान एशिया के दूसरे नंबर के बड़े रेलवे यार्ड के रूप में भी है। इस घटना के बाद यार्ड की सुरक्षा व्यवस्था, मरम्मत के लिए रखे डिब्बों को सुरक्षित करने की प्रक्रिया और कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
सवाल यह है कि डिब्बों को हिलने से रोकने के लिए ज़रूरी सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे या नहीं, और क्या रेलवे कर्मचारियों से लापरवाही हुई। मुसाफिर और आम लोग इसकी गहरी जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी यह भी मांग है कि जांच में लापरवाही मिले तो जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई की जाए।
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