गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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03:29 IST

थोक और खुदरा महंगाई दर अगस्त में बढ़े, त्योहारी सीजन में जेब पर पड़ेगा असर

गणेशोत्सव के बीच महंगाई ने रफ्तार पकड़ी, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से आम आदमी परेशान

थोक और खुदरा महंगाई दर अगस्त में बढ़े, त्योहारी सीजन में जेब पर पड़ेगा असर
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गणेशोत्सव चल ही रहा था कि महंगाई ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। थोक और खुदरा महंगाई के जो नए आंकड़े सामने आए हैं, उन्हें देखकर आम लोगों का वर्तमान और भविष्य दोनों चिंता में डूब गए हैं। आने वाले दिनों में लोगों की जेब पर बड़ा बोझ पड़ने वाला है, क्योंकि अब हर चीज के लिए पहले से ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे, यह साफ हो गया है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को जो आंकड़े जारी किए, उनके मुताबिक खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने की वजह से अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 फीसदी पर पहुंच गई। वहीं थोक महंगाई दर अगस्त 2026 में सालाना आधार पर बढ़कर 9.92 फीसदी हो गई, जो जुलाई में 9.78 फीसदी थी। जुलाई महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई 4.45 फीसदी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के मुताबिक अगस्त में सभी चीजों का डब्ल्यूपीआई 110.8 दर्ज हुआ, जो जुलाई में 110.0 था। ये सारे आंकड़े 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गई नई डब्ल्यूपीआई सीरीज पर आधारित हैं।

तीन मुख्य समूहों में से प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई की बात करें तो जुलाई में जारी सीपीआई आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में अनाज और खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़कर 5.95 फीसदी पर पहुंच गई, जो जुलाई में 5.52 फीसदी थी। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 फीसदी रखा है। इसमें दूसरी तिमाही में 4.7 फीसदी, तीसरी तिमाही में 5.9 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.5 फीसदी महंगाई रहने की उम्मीद जताई गई है।

इसी दौरान ईंधन और बिजली की महंगाई दर 20.05 फीसदी से सीधे बढ़कर 22.93 फीसदी पर पहुंच गई है। वहीं निर्मित वस्तुओं की महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी हुई है, यह 8.29 फीसदी से बढ़कर 8.37 फीसदी हो गई।

रसोई से लेकर आपकी जेब तक, महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों ने आम जनता की चिंता और बढ़ा दी है। जुलाई महीने में देश का खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) बढ़कर 4.45 फीसदी पर पहुंच गया, जो इससे पहले जून महीने में 4.38 फीसदी था। यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के 4.50 फीसदी के अनुमान से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन फिर भी यह रिजर्व बैंक के 4 फीसदी के तय लक्ष्य से लगातार ऊपर बना हुआ है।

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