पुणे में दिवाली पहाट मैफिल के दौरान मृदंगवादक श्रीधर पार्थसारथी का निधन
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बाणेर में चल रही मैफिल में मृदंग बजाते हुए दिल का दौरा पड़ा। 56 साल के श्रीधर पार्थसारथी को अस्पताल ले जाया गया, पर उन्हें बचाया नहीं जा सका।
देश के जाने-माने और वरिष्ठ मृदंगवादक श्रीधर पार्थसारथी का पुणे में एक मैफिल के दौरान अचानक निधन हो गया। वे सिर्फ 56 साल के थे। संगीत की सेवा करते-करते ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा, इसलिए पूरे संगीत जगत में शोक की लहर है।
हादसा पुणे के बाणेर इलाके में हुआ, जहां "दिवाली पहाट" मैफिल का आयोजन किया गया था। श्रीधर पार्थसारथी वहां मृदंग बजा रहे थे। प्रस्तुति पूरे रंग में थी, तभी उन्हें दिल का तेज दौरा पड़ा और वे मंच पर ही गिर पड़े। वहां मौजूद लोग उन्हें तुरंत पास के एक प्राइवेट अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने काफी कोशिश की, लेकिन वे उन्हें बचा नहीं पाए और उनकी सांसें थम गईं।
संगीत की दुनिया में श्रीधर पार्थसारथी का योगदान बहुत अहम रहा है। उन्होंने महज छह साल की उम्र से संगीत की तालीम लेनी शुरू कर दी थी। मशहूर संगीत गुरु विद्वान कारैकुडी आर. चंद्रमौळी के मार्गदर्शन में उन्होंने मृदंग वादन की बारीकियां सीखीं।
आगे चलकर उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत के बड़े नामों के साथ संगत की। इनमें डी. के. पट्टम्मळ, विद्वान मदुराई जी. एस. मणी, डॉ. एम. बालमुरलीकृष्ण और विद्वान रंगनाथ शर्मा शामिल हैं। इसके अलावा शंकर महादेवन, संजीव अभ्यंकर, रतनमोहन शर्मा और नंदकिशोर मुळे के साथ उनकी जुगलबंदी की मैफिलें बेहद पसंद की गई थीं।
उनके निधन की खबर मिलते ही संगीत जगत से गहरा दुख जताया जा रहा है। मशहूर गायक और संगीतकार शंकर महादेवन ने इंस्टाग्राम पर भावुक पोस्ट लिखकर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, "यह खबर पचाना बेहद मुश्किल है। यह पूरे संगीत जगत का ऐसा नुकसान है, जो कभी भरा नहीं जा सकता। करीब 40 साल पहले जब मैंने अपनी पहली कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की मैफिल की थी, तब मेरे पीछे मृदंग पर श्रीधर ही थे। एक लाइव मैफिल में बजाते हुए उन्होंने दुनिया से विदाई ली, इससे ज्यादा असाधारण क्या हो सकता है!"
बाणेर की इस मैफिल में हुई घटना के बाद शास्त्रीय संगीत के चाहने वाले और उनके साथ काम कर चुके कलाकार सदमे में हैं। 56 साल की उम्र में मंच पर ही उनका जाना संगीत प्रेमियों के लिए एक बड़ा झटका है।
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