पुणे में बिना परमिट चल रही रैपिडो बाइक टैक्सी पर रोक, कलेक्टर ने दिया तुरंत बंद करने का आदेश
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पुणे और पिंपरी-चिंचवड में बिना परमिट चल रही रैपिडो की बाइक टैक्सी सेवा पर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। जब तक सरकार से बाकायदा इजाजत नहीं मिलती, तब तक यह सर्विस फौरन बंद रखनी होगी। यह साफ निर्देश पुणे प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की बैठक में जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने दिया।
ओला, उबर और रैपिडो जैसी एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी और उनके खिलाफ बढ़ती शिकायतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया। बैठक जिलाधिकारी कार्यालय में हुई। उसमें प्रादेशिक परिवहन अधिकारी अर्चना गायकवाड, उप-प्रादेशिक परिवहन अधिकारी स्वप्निल भोसले और पिंपरी-चिंचवड के उप-प्रादेशिक परिवहन अधिकारी राहुल जाधव मौजूद थे। इनके साथ ट्रैफिक विभाग के पुलिस अधिकारी और अलग-अलग रिक्शा व कैब यूनियनों के नुमाइंदे भी आए थे।
रिक्शा और टैक्सी यूनियनें इस मामले में पहले ही प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जता चुकी थीं। महाराष्ट्र रिक्शा पंचायत के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. बाबा कांबळे समेत कई संगठनों का कहना था कि रैपिडो बिना किसी कानूनी या सरकारी इजाजत के बाइक टैक्सी चला रही है। संगठनों का आरोप है कि इस गैरकानूनी सर्विस से हजारों रिक्शा और टैक्सी चालकों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। उनकी मांग यह भी थी कि प्रशासन सिर्फ जुबानी निर्देश देकर न रह जाए, आदेश तोड़ने वालों पर मामले भी दर्ज किए जाएं।
बैठक में सिर्फ बाइक टैक्सी ही नहीं, बल्कि दूसरी एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी किराया वसूली पर लगाम कसने के लिए भी कुछ सख्त नियम लागू किए गए हैं।
किराए को लेकर तय हुआ है कि ओला, उबर, रैपिडो और सभी रिक्शा व कैब चालक सरकार से मंजूर मीटर दर के हिसाब से ही सवारियों से किराया लेंगे।
कंपनियों के लिए जानकारी देना भी जरूरी कर दिया गया है। ओला, उबर और रैपिडो को चालू महीने के सभी सफर और किराया दरों की पूरी जानकारी आने वाली 10 नवंबर तक आरटीए के सामने रखनी होगी। इसी से जांचा जाएगा कि नियमों का ठीक से पालन हो रहा है या नहीं।
सरकारी मीटर दरों पर सही अमल हो, इसके लिए शहर के सभी संबंधित पुलिस थानों को जरूरी हिदायतें दी जाएंगी।
अब पुणे और पिंपरी-चिंचवड के ट्रांसपोर्ट सेक्टर की नजर इस पर है कि जिलाधिकारी के इन निर्देशों पर जमीन पर कितनी सख्ती से अमल होता है और कंपनियां इस पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।