पुणे के ध्रुव ग्लोबल स्कूल के 58 बच्चों की 24 घंटे की तैराकी एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज
ध्रुव ग्लोबल स्कूल के 58 विद्यार्थियों ने 8 और 9 अक्टूबर को लगातार 24 घंटे की रिले स्विमिंग मैराथन में हिस्सा लिया और स्कूल का नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे: ध्रुव ग्लोबल स्कूल का नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है। स्कूल के 58 विद्यार्थियों ने लगातार 24 घंटे चली रिले स्विमिंग मैराथन में हिस्सा लिया, और इसी के आधार पर यह रिकॉर्ड बना। यह आयोजन 8 और 9 अक्टूबर के बीच हुआ।
एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की परीक्षक डॉ. चित्रा जैन ने कहा कि लगातार 24 घंटे की इस रिले स्विमिंग मैराथन में 58 विद्यार्थियों की भागीदारी दर्ज करके स्कूल ने रिकॉर्ड बनाया है। उनके मुताबिक इस आयोजन से बच्चों ने शारीरिक तंदुरुस्ती, टीम भावना, अनुशासन और जिद का प्रेरणादायी संदेश दिया। डॉ. जैन यह बात इसी मौके पर बोल रही थीं, जब स्कूल की ओर से कराई गई 24 घंटे की रिले स्विमिंग मैराथन को रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने की घोषणा हुई।
स्कूल के चेयरमैन संजय मालपाणी, डायरेक्टर यशोवर्धन मालपाणी और अनिष्का मालपाणी के मार्गदर्शन में यह आयोजन कामयाब रहा। प्राचार्य संगीता राऊतजी ने इसमें सहयोग दिया। नियोजन की जिम्मेदारी खेल समन्वयक गिरीश टोकसे और रोहित पाटील ने संभाली। बच्चों को तैराकी सिखाने वाले शिक्षक स्मिता काथवे, रुपाली अनप, विशाल नरवडे, उमा जोशी, अनिकेत सरदार और कपिलेश हारणे ने उन्हें गाइड किया। इन सबकी प्लानिंग, ट्रेनिंग और सहयोग की वजह से ही बच्चों को 24 घंटे की रिले स्विमिंग मैराथन में उतरकर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में रिकॉर्ड दर्ज कराने का मौका मिला।
संगीता राऊतजी ने कहा कि इस प्रतियोगिता से बच्चों को सिर्फ जीत की खुशी ही नहीं मिली, बल्कि जिंदगी की चुनौतियों से पार पाने का आत्मविश्वास भी मिला। किसी भी मुश्किल का सामना करते वक्त निरंतरता, जिद और प्रतिबद्धता जरूरी होती है, यह जीवन मंत्र बच्चों ने इस अनुभव से सीखा है।
उन्होंने बताया कि स्कूल में बच्चों का दिन खेल, ध्यान और योग से शुरू होता है। पढ़ाई के साथ सेहत का ख्याल रखना और जिंदगी में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। समर्पण, प्रतिबद्धता और लगन के दम पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है, और यही संतुलन ध्रुव की कामयाबी की बुनियाद है।
संगीता राऊतजी, प्राचार्य, ध्रुव ग्लोबल स्कूल: "इस ऐतिहासिक पल के पीछे हर विद्यार्थी की मेहनत, प्रशिक्षकों का समर्पण और पूरी खेल टीम का योगदान है। बच्चों को तैयार करने के लिए शिक्षकों, प्रशिक्षकों और आयोजकों ने जो मेहनत की है, वह काबिले तारीफ है। सबकी एकजुटता से ही यह गौरवशाली पल साकार हुआ है, और यह उपलब्धि स्कूल के लिए गर्व की बात है।"
डॉ. चित्रा जैन, परीक्षक, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स: "लगातार 24 घंटे की स्विमिंग मैराथन पूरी करना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। इसके लिए ताकत, सहनशक्ति और हार न मानने का जज्बा चाहिए। बच्चों ने मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास के दम पर यह रिकॉर्ड बनाया है। इस कामयाबी के लिए सभी तैराकों, प्रशिक्षकों, शिक्षकों और पालकों को दिल से बधाई।"
चौथी कक्षा की छात्रा भूमी पाटील ने कहा कि स्विमिंग मैराथन में हिस्सा लेना उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा अनुभव है। उसका स्लॉट दोपहर ढाई से तीन बजे तक था। दर्शकों से मिले हौसले की वजह से उसे बहुत अच्छा लगा। सीटी बजने तक तैरते रहने की जिद उसके मन में थी। यह अनुभव उसके लिए हमेशा यादगार रहेगा।