दिवाली पर पुलिस को एडवांस नहीं, बोनस चाहिए: नागपुर के पुलिस बॉयज़ असोसिएशन ने फडणवीस को लिखा पत्र
पुलिस बॉयज़ असोसिएशन ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर दिवाली एडवांस को बोनस में बदलने की मांग की है।
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नागपुर: दिवाली आते ही पुलिस वालों को मिलने वाली एडवांस रकम पर सवाल उठ गया है। पुलिस बॉयज़ असोसिएशन ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी भेजकर मांग की है कि हर साल दी जाने वाली यह एडवांस रकम माफ कर दी जाए और उसे त्योहार के बोनस की तरह दिया जाए। असोसिएशन का कहना है कि तनख्वाह से हर महीने पैसे कटने का बोझ पुलिस बल पर बेवजह पड़ता है।
यह पत्र नागपुर शहर और ग्रामीण जिले के अध्यक्ष अमित शिवमणि दुबे ने लिखा है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र पुलिस के जवानों को दिवाली पर हर साल 12,500 रुपये की एडवांस मिलती है। बाद में यह रकम वापस ली जाती है, और इसके लिए हर महीने 1,250 रुपये तनख्वाह से काट लिए जाते हैं। असोसिएशन इसे पुलिस के साथ सरासर नाइंसाफी मानता है। उसका सवाल सीधा है कि जो लोग इतने मुश्किल हालात में नौकरी करते हैं, उन्हें त्योहार पर ऐसी मदद क्यों न मिले जो सच में काम आए, न कि ऐसी रकम जिसे लौटाना पड़े।
चिट्ठी में पुलिस की ड्यूटी का हाल भी बयान किया गया है। लिखा है कि पुलिस के जवान "सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय" के ध्येय पर चलते हैं, यानी अच्छे लोगों की हिफाजत और बुरे लोगों पर लगाम, और चौबीसों घंटे जनता की सेवा में लगे रहते हैं। ड्यूटी का कोई तय वक्त नहीं होता। इसी वजह से उन पर शारीरिक और मानसिक तनाव बना रहता है। असोसिएशन के मुताबिक इसका असर सेहत पर साफ दिखता है और जवानों को पाइल्स यानी बवासीर, बीपी और शुगर जैसी गंभीर बीमारियां घेर लेती हैं। पत्र में इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि बढ़ते दबाव के बीच कुछ पुलिस वाले आत्महत्या जैसा कदम तक उठा लेते हैं।
असोसिएशन ने याद दिलाया है कि जनता की सेवा करते हुए पुलिस वालों ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं। कोरोना के दौर से लेकर आज तक कई पुलिसकर्मियों ने अपनी जान तक न्योछावर की है।
अपनी मांग के पक्ष में दुबे ने केंद्र सरकार के उस फैसले का हवाला दिया है, जिसके तहत रेलवे के कर्मचारियों को दिवाली बोनस मिलता है। उनका कहना है कि जैसे केंद्र ने रेलवे वालों के लिए यह रास्ता चुना, वैसे ही महाराष्ट्र सरकार को भी राज्य के पुलिस वालों के लिए यही तरीका अपनाना चाहिए। मांग यह है कि 12,500 रुपये की एडवांस माफ कर दी जाए, उसे बोनस के रूप में दिया जाए और बाद में तनख्वाह से कोई कटौती न हो। दुबे के मुताबिक ऐसा होने पर पुलिस वाले और उनके परिवार कर्ज चुकाने की फिक्र के बिना त्योहार की खुशी मना सकेंगे।
इस निवेदन की एक कॉपी विचार के लिए महाराष्ट्र राज्य के पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई है। अब सबकी नजर सरकार पर है कि वह इस मांग पर क्या फैसला लेती है। फिलहाल पत्र में बस यही गुहार है कि दिवाली पर पुलिस वालों को एडवांस की जगह बोनस मिले और हर महीने होने वाली कटौती बंद हो।
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