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प्राचीन शिक्षा की विरासत संभालना वक्त की ज़रूरत: मुख्यमंत्री फडणवीस

नागपुर के मिहान में IIM में नवें अंतरराष्ट्रीय प्राचार्य शैक्षणिक सम्मेलन का समापन हुआ। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्राचीन भारतीय शिक्षा की विरासत, मातृभाषा और AI के दौर में मूल्यों पर बात की।

प्राचीन शिक्षा की विरासत संभालना वक्त की ज़रूरत: मुख्यमंत्री फडणवीस तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था की विरासत को संभालकर रखना और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना वक्त की ज़रूरत है। वे नागपुर के मिहान में इंडियन इन्स्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) में हुए नवें अंतरराष्ट्रीय प्राचार्य शैक्षणिक सम्मेलन के समापन पर बोल रहे थे।

फडणवीस के मुताबिक भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था पूरी दुनिया के लिए ज्ञान का बड़ा स्रोत थी। तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसी यूनिवर्सिटियों में दुनियाभर से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। उन्होंने कहा कि उस दौर की पढ़ाई सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं थी। उसमें शास्त्र, संवाद, हुनर और सीधे तजुर्बे को अहमियत दी जाती थी। आचार्य चाणक्य और पाणिनि जैसे विद्वानों का काम आज भी रास्ता दिखाता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी वजह से जागतिक व्यापार, अर्थव्यवस्था और निर्यात में भी भारत की जगह अहम थी। कई हमलों की वजह से देश की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था कमज़ोर पड़ गई। लेकिन समाज सुधारकों ने शिक्षा की परंपरा को फिर से जमाने में बड़ा योगदान दिया। फडणवीस ने कहा कि अब इसी ऐतिहासिक विरासत से प्रेरणा लेकर आधुनिक शिक्षा व्यवस्था खड़ी करने की ज़रूरत है।

आज की पीढ़ी के बारे में उन्होंने कहा कि वह जानकारी के विस्फोट के दौर में पैदा हुई है और टेक्नोलॉजी की तेज़ रफ्तार के साथ बड़ी हो रही है। इस पीढ़ी को 'जनरेशन वॉव' (वर्ल्ड ऑफ वंडरफुल जनरेशन) कहा गया है। उसके पास जानकारी के अनगिनत स्रोत हैं।

मगर जानकारी को ज्ञान में बदलना, सही और गलत की पहचान करना और उसे ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करना बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में इंसानी मूल्य, नैतिकता और चरित्र को बचाए रखना ज़रूरी है। टीचरों की भूमिका सिर्फ बच्चों को जानकारी देने तक नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनकी सोचने की प्रक्रिया को सही दिशा देने वाली होनी चाहिए।

मातृभाषा पर ज़ोर देते हुए फडणवीस ने कहा कि विकसित देशों की शिक्षा व्यवस्था उनकी अपनी मातृभाषा पर टिकी है। इसलिए भारत को भी मातृभाषा का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने अपील की कि विद्यार्थी टेक्नोलॉजी के गुलाम बनने के बजाय उसे सही तरीके से इस्तेमाल करने का हुनर सीखें। उन्होंने यह भी साफ किया कि राष्ट्रीय शैक्षणिक नीति के ज़रिए शिक्षा के क्षेत्र में कई नए प्रयोग किए जा रहे हैं।

इस मौके पर स्कूली शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर ने कहा कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान पाने का साधन नहीं, बल्कि समाज में बदलाव का ज़रिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री माझी शाळा, सुंदर शाळा और मुख्यमंत्री विज्ञान विद्यार्थी वारी जैसी पहलों का भी ज़िक्र किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के हाथों 'पाथेय - द गोल्डन एलिक्सिर' नाम की ई-स्मरणिका का विमोचन हुआ। शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. नितीश भारद्वाज को सर्वोत्तम नचिकेत पुरस्कार दिया गया। रजिया हुसेन और श्रद्धा केळापुरे को जीवनगौरव नचिकेत पुरस्कार मिला, जबकि डॉ. इंदिरा नयना और कंचन उके को सुपर नचिकेता पुरस्कार से नवाज़ा गया। आईआईएम नागपुर के संचालक डॉ. भीमराया मेत्री समेत शिक्षा क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं।

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