शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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02:55 IST

सप्तशृंगी देवी को अर्धशक्तिपीठ क्यों कहते हैं, झुकी हुई मूर्ति की मान्यता क्या है

नाशिक जिले के वणी परिसर में सात पर्वतों की गोद में बसा सप्तशृंगी देवी का मंदिर महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में अर्धशक्तिपीठ माना जाता है।

सप्तशृंगी देवी को अर्धशक्तिपीठ क्यों कहते हैं, झुकी हुई मूर्ति की मान्यता क्या है तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में सप्तशृंगी देवी के मंदिर को भी खास धार्मिक महत्त्व दिया जाता है। यह मंदिर नाशिक जिले के वणी परिसर में सात पर्वतों की गोद में बसा है और यहां दर्शन के लिए श्रद्धालु भक्त साल भर आते रहते हैं। श्रद्धा है कि सप्तशृंगी देवी के 18 हाथ हैं और वे भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। हर हाथ में देवताओं के दिए हुए शस्त्र हैं।

महाराष्ट्र की परंपरा के मुताबिक कोल्हापुर की महालक्ष्मी, तुलजापुर की तुलजाभवानी और माहूर की रेणुका माता को तीन पूर्ण शक्तिपीठ माना जाता है। इनके बाद नाशिक जिले की सप्तशृंगी देवी को अर्धशक्तिपीठ का मान मिला है। स्थानीय धार्मिक मान्यता है कि देवी यहां कुमारिका यानी बालिका स्वरूप में विराजमान हैं, इसलिए इस स्थान को अर्धशक्तिपीठ कहा जाता है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह वर्गीकरण श्रद्धा, मान्यता और परंपरा पर आधारित है।

पौराणिक कथा के अनुसार राजा दक्ष के आयोजित यज्ञ में भगवान शंकर का अपमान हुआ, तो माता सती ने यज्ञकुंड में देहत्याग कर दिया। इससे क्रोधित भगवान शंकर सती का पार्थिव शरीर लेकर तांडव करने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अलग-अलग हिस्से कर दिए, ऐसी कथा सुनाई जाती है। मान्यता है कि सती का दायां हाथ नाशिक के पास सप्तशृंग पर्वत पर गिरा। इसी वजह से शक्तिपीठ की परंपरा में इस स्थान का बड़ा महत्त्व बना।

एक और धार्मिक कथा के मुताबिक महिषासुर का वध करने के बाद देवी का रौद्र रूप शांत हुआ और उन्होंने सह्याद्री की सप्तशृंग पर्वतमाला में निवास किया। सप्तशृंगी देवी का रूप शक्ति और करुणा का प्रतीक माना जाता है।

देवी की मूर्ति एक तरफ थोड़ी झुकी हुई दिखती है। लोकश्रद्धा है कि ऋषि मार्कंडेय जब देवी की स्तुति और दुर्गासप्तशती का पठन कर रहे थे, तब उनकी बात सुनने के लिए देवी उसी दिशा में झुक गईं।

मूर्ति करीब 8 फुट ऊंची है और सिंदूर के लेप की वजह से भगवा रंग की दिखती है। बताया जाता है कि देवी के हाथों में त्रिशूल, सुदर्शन चक्र, धनुष-बाण और तलवार जैसे आयुध हैं। मंदिर समुद्र तल से करीब 4,800 फुट की ऊंचाई पर है और वहां पहुंचने के लिए करीब 472 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

नवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। नारियल, साड़ी, कुमकुम और फूलों से देवी की गोद भरी जाती है। पूरनपोली का प्रसाद भी भक्तों में काफी लोकप्रिय है।

सप्तशृंगी देवी का मंदिर सिर्फ श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा है। अर्धशक्तिपीठ की मान्यता, सती के हाथ की पौराणिक कथा और देवी की झुकी हुई मूर्ति से जुड़ी किंवदंती की वजह से श्रद्धालुओं में इस स्थान को लेकर खास उत्सुकता रहती है।

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