मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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पीआई इंडस्ट्रीज ने उतारा पायॉक्सानिलीप्रोल, भारत में खोजा गया पहला कीटनाशक मॉलिक्यूल

पीआई इंडस्ट्रीज ने उतारा पायॉक्सानिलीप्रोल, भारत में खोजा गया पहला कीटनाशक मॉलिक्यूल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

पीआई इंडस्ट्रीज ने आज पायॉक्सानिलीप्रोल लॉन्च किया है। कंपनी के मुताबिक यह देश का पहला कीटनाशक मॉलिक्यूल है, जो पूरी तरह भारत में हुई अपनी रिसर्च से खोजा गया। इसे बनाने में एक दशक से ज्यादा वक्त लगा। इस दौरान मूल रिसर्च हुई, लगातार निवेश किया गया और वैज्ञानिक नवाचार का सहारा लिया गया।

पीआई का कहना है कि यह कामयाबी कंपनी और भारत के फसल संरक्षण उद्योग के लिए अहम पड़ाव है। पायॉक्सानिलीप्रोल दिखाता है कि देश में नई वैज्ञानिक खोज करने और अपनी बौद्धिक संपदा तैयार करने की क्षमता बढ़ रही है। भारत में तरह-तरह की फसलें हैं, कृषि-जलवायु की स्थितियां अलग-अलग हैं और कीटों का प्रकोप भी बदलता रहता है। इस वजह से यह दुनिया का सबसे बड़ा और विविध कृषि तंत्र है। पीआई आठ दशक से ज्यादा समय से भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों के साथ काम कर रही है। किसानों से पीढ़ियों का नाता भी रहा है, और इसी से कंपनी ने इस जटिलता की गहरी समझ बनाई है।

यह मॉलिक्यूल भारत की खेती की जमीनी हकीकत की समझ को पीआई की आधुनिक वैज्ञानिक खोज क्षमता से जोड़ता है। इसे वैश्विक वैज्ञानिक मानकों के हिसाब से तैयार किया गया। फिर भारतीय खेती की परिस्थितियों में इसकी गहराई से जांच हुई। इसमें राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों समेत भारत के कृषि रिसर्च तंत्र की भागीदारी से अलग-अलग जगह खेतों में ट्रायल, वैज्ञानिक आकलन और नियामक अध्ययन किए गए।

पायॉक्सानिलीप्रोल को भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति (सीआईबी एंड आरसी) से रजिस्ट्रेशन मिल गया है। समिति ने इसे भारत में खोजे गए पहले कीटनाशक सक्रिय घटक के तौर पर आधिकारिक मान्यता दी है।

पीआई इंडस्ट्रीज लिमिटेड के वाइस चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर मयंक सिंघल ने कहा, "दशक भर पहले हमने भारत में मूल फसल-संरक्षण समाधान खोजने की क्षमता खड़ी करने का लक्ष्य रखा था। इसके लिए पुरानी धारणाओं को चुनौती देने की हिम्मत, बड़ी और लंबे समय की पूंजी और वह कर दिखाने का पक्का भरोसा चाहिए था, जो पहले कभी नहीं हुआ था। आज पायॉक्सानिलीप्रोल साबित करता है कि जब भारत की खेती की हमारी गहरी समझ और विश्वस्तरीय विज्ञान एक साथ आते हैं, तो क्या मुमकिन है।"

सिंघल ने यह भी कहा, "यह पीआई और भारतीय कृषि नवाचार के लिए बेहद गर्व का पल है। यह कामयाबी हमारी उस महत्वाकांक्षा को और मजबूती देती है, जिसमें हम भारत से दुनिया के लिए मूल विज्ञान और बौद्धिक संपदा बनाने वाली, नवाचार पर टिकी ग्लोबल लाइफ साइंसेज कंपनी खड़ी करना चाहते हैं।"

कंपनी के मुताबिक यह खोज उसके एकीकृत रिसर्च और डेवलपमेंट तंत्र में लंबे निवेश को दिखाती है। यह तंत्र मॉलिक्यूलर डिस्कवरी, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, फॉर्मूलेशन साइंस, टॉक्सिकॉलॉजी, एग्रोनॉमी, प्रोसेस डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग तक फैला है। पीआई के पास 700 से ज्यादा वैज्ञानिक, 200 से ज्यादा पीएचडी धारक और 260 से ज्यादा पेटेंट का पोर्टफोलियो है। इनके दम पर कंपनी ने मूल खोजों को विकसित करने और उन्हें बाजार में उतारने के लिए जरूरी वैज्ञानिक गहराई और बुनियादी ढांचा खड़ा किया है।

कंपनी का कहना है कि पायॉक्सानिलीप्रोल की अहमियत सिर्फ एक मॉलिक्यूल तक सीमित नहीं है। यह पीआई की व्यापक इनोवेशन पाइपलाइन का पहला नतीजा है, जिसमें केमिस्ट्री, बायोलॉजी और बायोकेमिकल समाधान शामिल हैं। कंपनी इसे भारत की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता के सफर का अहम कदम बताती है, जो देसी रिसर्च क्षमता को और मजबूत करता है और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय कृषि नवाचार को मौका देता है।

पीआई इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन नारायण के. शेषाद्री ने कहा, "पायॉक्सानिलीप्रोल भारतीय कृषि विज्ञान के विकास में बेहद अहम पड़ाव है। ऐसे क्रांतिकारी नवाचार के लिए स्थापित ढांचे से आगे सोचने की क्षमता, वैज्ञानिक ताकत, धैर्य वाला निवेश और लंबे समय की प्रतिबद्धता चाहिए। पीआई इंडस्ट्रीज के लिए पायॉक्सानिलीप्रोल नेक्स्ट-जनरेशन खोजों की मजबूत बुनियाद बना है। यह लगातार इनोवेशन पाइपलाइन खड़ी करने, देसी रिसर्च क्षमता बढ़ाने और वैश्विक कृषि क्षेत्र के लिए अलग पहचान रखने वाली तकनीक विकसित करने की कंपनी की प्रतिबद्धता को और पक्का करता है।"

कंपनी के मुताबिक भारत के पहले देसी कीटनाशक की खोज से लेकर आगे की खोजों तक, पायॉक्सानिलीप्रोल पीआई और भारतीय कृषि नवाचार के लिए नया दौर शुरू कर रहा है।

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