पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी घटी, CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक की रजिस्ट्रेशन में बढ़त
सितंबर 2026 में पेट्रोल कारों का रजिस्ट्रेशन हिस्सा 41.27% रहा, जबकि वैकल्पिक ईंधन वाली कारों का हिस्सा बढ़ा है।
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भारत के कार बाजार में ईंधन को लेकर ग्राहकों की पसंद बदलती दिख रही है। कुल रजिस्ट्रेशन में पेट्रोल कारों का हिस्सा घट रहा है, जबकि CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों का हिस्सा तेजी से बढ़ रहा है।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2026 में पेट्रोल कारों का रजिस्ट्रेशन हिस्सा 41.27% रहा। पिछले साल इसी महीने में यह 47.18% था। यानी एक साल में पेट्रोल का हिस्सा 5.91 प्रतिशत पॉइंट कम हुआ है।
इलेक्ट्रिक वाहनों का हिस्सा सितंबर 2026 में 8.45% हो गया, जो सितंबर 2025 में 5.74% था। इस तरह इसमें 2.71 प्रतिशत पॉइंट की बढ़त दर्ज हुई। हाइब्रिड कारों का हिस्सा भी अच्छा बढ़ा है। पिछले साल यह 7.30% था और अब 9.44% पर पहुंच गया है।
CNG और LPG वाहनों का हिस्सा भी ऊपर गया है। सितंबर 2025 में यह 22.02% था और सितंबर 2026 में 23.11% हो गया। इसके उलट डीजल वाहनों का हिस्सा लगभग वहीं टिका रहा। वह 17.76% से 17.74% पर आया।
अगस्त 2026 में CNG, LPG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों का मिला-जुला हिस्सा 41.95% था, जबकि उसी महीने पेट्रोल का हिस्सा 40.85% दर्ज हुआ। यानी इन वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों ने मिलकर पेट्रोल को पीछे छोड़ दिया। सितंबर में दोनों के बीच का फासला कम हुआ। वैकल्पिक ईंधनों का मिला-जुला हिस्सा 41% रहा और पेट्रोल का 41.27%।
बढ़ती मांग को देखते हुए कार कंपनियां अलग-अलग ईंधन वाले मॉडलों पर ध्यान दे रही हैं। मारुति सुजुकी के पास CNG कारें और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड मॉडल हैं। टाटा मोटर्स पेट्रोल, डीजल, CNG और इलेक्ट्रिक जैसे कई विकल्पों पर काम कर रही है। हुंदै, किया और महिंद्रा के पोर्टफोलियो में भी अलग-अलग पावरट्रेन वाले मॉडल हैं।
इन आंकड़ों से लगता है कि ग्राहकों की पसंद बदल रही है। लेकिन पेट्रोल कारों का रजिस्ट्रेशन हिस्सा घटने का मतलब यह नहीं कि उनकी बिक्री हर महीने घटी ही है। रजिस्ट्रेशन में हिस्सा कुल वाहन रजिस्ट्रेशन के मुकाबले नापा जाता है। आगे चलकर ईंधन का खर्च, गाड़ियों की कीमत, चार्जिंग की सुविधा और सरकारी नीतियां कार बाजार पर बड़ा असर डाल सकती हैं।