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22:50 IST

पेरिस से मुंबई आए 23 साल के निको ने तीन हफ्ते में देखा शहर का असली रंग

फायनान्स में करियर बनाने भारत आए निको को शुरू में मुंबई से डर लगा, अब वही शहर उन्हें अपना लगता है।

पेरिस से मुंबई आए 23 साल के निको ने तीन हफ्ते में देखा शहर का असली रंग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

सोचिए, कोई शख्स शांत और नियम-कायदे वाले यूरोपियन शहर में पला-बढ़ा हो और अचानक मुंबई की भीड़ में आ जाए, तो उस पर क्या गुजरेगी? पेरिस से आए 23 साल के निको को कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ है।

निको पेरिस की आरामदेह जिंदगी छोड़कर भारत आए। उनके दिमाग में बस एक बात थी कि फाइनेंस में अच्छा करियर बनाना है। लेकिन मुंबई में कदम रखते ही उनके सारे विचार बदल गए। यहां की एनर्जी, भीड़ और अफरातफरी ने उनकी जिंदगी ही बदल दी।

उन्हें मुंबई आए अभी सिर्फ तीन हफ्ते हुए हैं। इतने कम दिनों में इस शहर ने उन्हें वे सबक दिए, जो पेरिस के किसी बड़े कॉलेज में नहीं मिल पाते। निको ने अपना यह अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया और कैप्शन में इसे विस्तार से लिखा।

कैप्शन में निको ने सबसे पहले यहां के खाने की बात की। उन्होंने लिखा कि उन्हें पता था कि भारतीय खाना स्वादिष्ट होता है, लेकिन उसमें इतनी विविधता है और हर दिन कुछ नया खोजने में इतना मजा आएगा, इसका अंदाजा नहीं था। उनके मुताबिक यहां का तीखापन भी आसानी से सहा जा सकता है।

दूसरी बात उन्होंने लोगों से मिलने-जुलने के बारे में लिखी। निको के अनुसार, यहां आने पर वे किसी को नहीं जानते थे, लेकिन लोगों ने उनका खूब स्वागत किया और वे उनके बारे में जानने को उत्सुक थे। काम की जगह हो, बाहर घूमना हो या शहर को देखना, हर बार कोई नया इंसान मिल ही जाता है।

तीसरी बात यह कि देखने और खोजने लायक बहुत कुछ है। निको ने लिखा कि अकेली मुंबई इतनी विशाल लगती है कि कभी खत्म ही नहीं होगी। नए इलाके, रेस्टोरेंट, समुद्र किनारे, बाजार, त्योहार, वास्तुकला, नाइटलाइफ, हर हफ्ते के आखिर में बाहर निकलने और कुछ नया ढूंढने की एक नई वजह मिल जाती है।

निको ने लिखा कि तीन हफ्ते हो गए हैं और इस नए सफर की ये शायद वे बातें हैं जो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद आईं। इसमें कोई शक नहीं कि आगे और बहुत कुछ अनुभव करना बाकी है।

उनके वीडियो पर कई लोगों ने पूछा कि इतना खूबसूरत पेरिस छोड़कर मुंबई क्यों आए? इस पर निको ने जवाब दिया कि वे सिर्फ तनख्वाह के लिए भारत नहीं आना चाहते थे। उन्हें भारत की संस्कृति और यहां के लोगों को करीब से देखना था।

निको मानते हैं कि यहां भाषा समझ नहीं आती, भीड़ है और परेशानी भी है, फिर भी यह शहर जितना परेशान करता है, उससे ज्यादा प्यार देता है। शुरू में उन्हें इस शहर से डर लगता था, लेकिन अब यही शहर उन्हें अपना लगने लगा है। अब वे पूरी तरह मुंबईवासी बनकर इस शहर की भीड़ में घुल-मिल गए हैं।

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