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18:48 IST

पारडी में बच्ची से अश्लील हरकत के आरोप पर भीड़ ने पीटा, नारायण वैष्णव की मेयो अस्पताल में मौत

नागपुर के पारडी में मंगलवार रात भीड़ की पिटाई से घायल नारायण वैष्णव ने बुधवार को मेयो अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

नागपुर के पारडी इलाके में एक बच्ची से अश्लील हरकत के आरोप के बाद भीड़ ने 35 साल के नारायण वैष्णव को इतना पीटा कि मेयो अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी जान चली गई। वह पारडी के शिव नगर में रहता था। पुलिस ने उस पर लगे आरोपों और उसकी पिटाई, दोनों की जांच शुरू कर दी है।

उसके नाम की वर्तनी अलग-अलग जगह अलग मिली है। कहीं नारायण वैष्णव, कहीं नारायण मोहनदास वैष्णव और कहीं नारायणदास मनमोहनदास वैष्णव लिखा गया है। पुलिस के मुताबिक वह मूल रूप से छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला था और काम की तलाश में नागपुर आया था।

जो कुछ बताया जा रहा है, उसके हिसाब से शिव नगर में उन दिनों गणपति बैठाए गए थे और मंडल के पंडाल के पास कार्यक्रम चल रहे थे। नौ साल की बच्ची दूसरे बच्चों के साथ वहीं खेल रही थी। आरोप है कि पास में रहने वाले नारायण ने उससे कहा कि 'तुम्हारी मम्मी ने कुछ देर घर में रुकने को कहा है।' बच्ची उसकी बात पर भरोसा करके उसके घर चली गई। उस वक्त बच्ची के माता-पिता घर पर नहीं थे। एक रिपोर्ट में यह भी आया है कि आरोपी ने बच्ची को पिता के बुलाने की बात कहकर ले जाया और अंदर बत्ती बुझाकर दरवाजा बंद करने की कोशिश हुई।

बच्ची को शक हुआ तो उसने नारायण के हाथ पर काट लिया और वहां से भाग निकली। शोर मचाती हुई वह लोगों के बीच पहुंची और अपने परिवार को पूरी बात बता दी। पंडाल के आसपास पहले से काफी लोग थे, इसलिए बात कुछ ही देर में पूरे मोहल्ले में फैल गई और गुस्सा भड़क उठा।

करीब 70 से 80 लोगों की भीड़ उसके घर के बाहर जमा हो गई। कुछ लोगों ने उसे घर से बाहर खींच निकाला और लात-घूंसों से मारना शुरू कर दिया। आरोपों की गंभीरता को लेकर इलाके में तनाव था और हालात देखते-देखते हिंसक हो गए।

इसी बीच बच्ची के घरवाले थाने पहुंचे। अलग-अलग बयानों में कहीं पिता और कहीं दादा के पहुंचने का जिक्र है। उन्होंने पुलिस को घटना बताई और यह भी कि लोग नारायण को पीट रहे हैं। पुलिस कंट्रोल रूम को भी रात करीब 11 से 12 बजे के बीच खबर दी गई। पारडी पुलिस मौके पर पहुंची तो बड़ी भीड़ देखकर और स्टाफ बुलाना पड़ा। तब तक पीटने वाले कई लोग वहां से जा चुके थे। नारायण खून से लथपथ जमीन पर पड़ा मिला और उसके शरीर पर गंभीर चोटें थीं।

पुलिस ने उसे भीड़ के बीच से निकालकर मेयो अस्पताल पहुंचाया। हालत नाजुक होने से उसे आईसीयू में रखा गया और डॉक्टर निगरानी में इलाज करते रहे। अस्पताल में पुलिस ने उसका बयान दर्ज किया। उसने बताया कि भीड़ में से करीब 8 से 10 लोगों ने उसे मारा, पर वह हमलावरों को पहचान नहीं पाया।

दिन और वक्त को लेकर रिपोर्टों में फर्क है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भीड़ ने उसे मंगलवार देर रात पीटा और बुधवार को उसकी मौत हुई। बाकी रिपोर्टों में पिटाई सोमवार की रात बताई गई है और मौत मंगलवार, 6 अक्टूबर की दोपहर की। मौत का वक्त भी कहीं करीब ढाई बजे और कहीं करीब साढ़े तीन बजे लिखा गया है। पुलिस ने उसके भाई को मौत की खबर दी।

पुलिस ने बच्ची के पिता की शिकायत पर नारायण के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था। बच्ची के साथ क्या हुआ, इसे लेकर बयान एक जैसे नहीं हैं। कहीं दुष्कर्म का आरोप लिखा गया, कहीं यौन उत्पीड़न का, कहीं छेड़छाड़ या अतिप्रसंग की कोशिश का। पुलिस इसकी जांच अलग से कर रही है और आगे की कार्रवाई सबूतों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर होगी।

नारायण को पीटने वालों पर भी केस है। एक हेड कांस्टेबल की शिकायत पर 8 से 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ अलग मामला दर्ज हुआ है। चूंकि मौत की असली वजह अभी साफ नहीं है, इसलिए आकस्मिक मृत्यु का केस भी दर्ज किया गया है। मौत पिटाई से हुई या किसी और कारण से, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा।

पारडी थाने की इंस्पेक्टर नंदा मनगटे ने बताया कि मारपीट के बाद नारायण को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस उसकी मौत के हालात और भीड़ की पिटाई, दोनों की जांच करेगी। इसके लिए आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी जा रही है, मोबाइल वीडियो खंगाले जा रहे हैं और चश्मदीदों से पूछताछ हो रही है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है। पुलिस यह भी पता कर रही है कि मारपीट की शुरुआत किसने की। जांच पूरी होने पर ही साफ होगा कि पिटाई में असल में कौन-कौन शामिल था। फिलहाल इलाके में हालात काबू में बताए जा रहे हैं।

कानून के जानकारों का कहना है कि आरोप कितना भी संगीन हो, सजा देने का हक अदालत का है। भीड़ अगर कानून हाथ में लेकर किसी की जान ले ले, तो यह अलग आपराधिक मामला बन सकता है।

नागपुर में आठ दिन के भीतर भीड़ के कानून हाथ में लेने की यह दूसरी घटना है। 29 सितंबर 2026 को बेलतरोड़ी थाना क्षेत्र की मॉडल मिल कॉलोनी के पृथ्वीराज नगर में उषा धार्मिक के घर कथित तौर पर लूटपाट की कोशिश करने वाले सुमेध उर्फ पराग गजभिए (29), निवासी नरसाला को लोगों ने पकड़कर पीटा था। आरोप था कि उसने घर की बुजुर्ग महिला के गहने छीनने की कोशिश की थी। बाद में उसकी भी मौत हो गई। उस मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई, हालांकि शरीर पर अंदरूनी चोटों के निशान भी मिले थे। दो घटनाओं के बाद शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और गंभीर आरोपों में कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति पर फिर बहस छिड़ गई है।

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