नवी मुंबई में बिल्डर से वसूली करने वाले त्रिभुवन सिंह और साथियों पर मकोका की कार्रवाई
आरटीआई कार्यकर्ता बनकर बिल्डर को धमकाने और पैसे वसूलने के आरोप में नवी मुंबई पुलिस ने त्रिभुवन लालबिहारी सिंह और उसके साथियों पर मकोका के तहत कार्रवाई का रास्ता खोल दिया है।
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नवी मुंबई पुलिस ने एक बिल्डर को धमकाकर पैसे वसूलने वाले त्रिभुवन लालबिहारी सिंह और उसके साथियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत कार्रवाई शुरू की है। आरोप है कि ये लोग खुद को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता बताकर बिल्डर को डराते थे। इस कार्रवाई के लिए सह पुलिस आयुक्त दीपक साकोरे ने 21 अक्टूबर को पहले से इजाजत दी।
मामला दिघा इलाके के बिल्डर जितेंद्र सिंह का है। उनके निर्माण कार्य ऐरोली सेक्टर 8-अ और दिघा परिसर में चल रहे हैं। आरोप के मुताबिक मई 2026 से आरोपी त्रिभुवन सिंह उन्हें बार-बार गाली-गलौज करता रहा। वह नगर निगम, सिडको और एमआयडीसी में शिकायत करने की धमकी भी देता था।
इतना ही नहीं, आरोप है कि उसने आर्थिक नुकसान पहुंचाने और हाथ-पैर तोड़ देने की धमकी भी दी। इसी डर के चलते कैश और ऑनलाइन मिलाकर कुल 1 लाख 35 हजार रुपये उससे वसूले गए। उसके बाद उसने पांच हजार रुपये और मांगे। इसी मांग को लेकर रबाले पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया था।
पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी त्रिभुवन लालबिहारी सिंह 47 साल का है और दिघा के ईश्वरनगर में रहता है। उसके खिलाफ रबाले, रबाले एमआयडीसी और कलवा पुलिस थानों में सात केस दर्ज हैं। इनमें पॉक्सो, एट्रोसिटी, जबरन चोरी और मारपीट जैसे मामले शामिल हैं। उसकी कथित संगठित अपराध गतिविधियों को गंभीरता से लेते हुए रबाले थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बालकृष्ण सावंत ने मकोका के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव रखा था।
यह प्रस्ताव पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) और परिमंडल-1 के उपायुक्त विजय खरात के जरिए सह पुलिस आयुक्त दीपक साकोरे के पास भेजा गया था। पहले से इजाजत मिल जाने के बाद आरोपी और उसके साथियों पर मकोका के तहत आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। मामले की आगे की जांच सहायक पुलिस आयुक्त विजय चौधरी (पोर्ट विभाग) कर रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक त्रिभुवन सिंह के खिलाफ पहले भी अलग-अलग पुलिस थानों में केस दर्ज हो चुके हैं। बिल्डरों से कथित वसूली मांगने के कुछ और मामलों का भी जिक्र सामने आया है। हालांकि, केस दर्ज होने का मतलब यह नहीं कि आरोपी उन मामलों में दोषी साबित हो चुका है। हर मामले के आरोपों की अलग कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।
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