सिडको ने नावडे का 18,820 घरों वाला टाउनशिप प्रोजेक्ट रद्द किया, बिना बिके घरों में फंसे करोड़ों
घरों की बिक्री सुस्त पड़ने और बेकार खर्च बढ़ने के बाद सिडको ने अपनी हाउसिंग पॉलिसी बदली है। नावडे में उच्च और मध्यम वर्ग के लिए प्रस्तावित टाउनशिप प्रोजेक्ट रद्द कर दिया गया है।
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घरों की बिक्री धीमी पड़ने और बेकार खर्च बढ़ने के चलते सिडको ने अपनी हाउसिंग पॉलिसी में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। इसी बदलाव के तहत नावडे में उच्च और मध्यम वर्ग के लिए प्रस्तावित 18 हजार 820 घरों का भारी-भरकम टाउनशिप प्रोजेक्ट रद्द कर दिया गया है।
सिडको ने तीन साल पहले नावडे नोड में 18,820 घर बनाने का फैसला लिया था। खास बात यह कि ये घर टू बीएचके होने वाले थे। लेकिन लोग सिडको के घरों से मुंह मोड़ रहे हैं, इसलिए अब इस बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट को समेटने का फैसला किया गया है।
पिछले कुछ सालों से सिडको अलग-अलग आर्थिक वर्गों के लिए बड़े पैमाने पर घर बनाने की नीति पर चल रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चार चरणों में करीब 97 हजार घर बनाने का लक्ष्य है। इनमें से 25 हजार से ज्यादा घर तैयार हो चुके हैं। मगर मांग और असल में उपलब्ध घरों के बीच बड़ा फर्क पैदा हो गया है। नतीजा यह कि कई नोड में तैयार घर अब भी बिना बिके पड़े हैं। इससे सिडको का करोड़ों रुपये का निवेश फंस गया है।
इसी पृष्ठभूमि में सिडको ने बिना सोचे-समझे बड़े पैमाने पर घर बनाने की पुरानी नीति किनारे रख दी है। अब वह 'मांग के हिसाब से हाउसिंग' की नई नीति की तरफ बढ़ रही है। बाजार की असली मांग का अध्ययन किए बिना बनाए गए घरों से आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। यह साफ होने के बाद सिडको ने यह सख्त फैसला लिया। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे आगे चलकर हाउसिंग प्रोजेक्ट का सही नियोजन होगा और सिडको पर पड़ा आर्थिक दबाव कुछ हद तक कम होगा।
सिडको के घरों को लोगों का रिस्पॉन्स न मिलने की कई वजहें बताई गई हैं। इन्हीं वजहों से लोग सिडको की लॉटरी को पसंद नहीं कर रहे। "मेरी पसंद का सिडको घर" नाम की महागृह निर्माण योजना को भी रिस्पॉन्स नहीं मिला। सिडको ने लॉटरी में जो घर जारी किए, उनकी कीमतें बहुत ज्यादा होने से लोग निराश हुए। नतीजा यह रहा कि कई लोगों ने लॉटरी के लिए आवेदन तो किया, पर जमानत रकम नहीं भरी। लोगों का रिस्पॉन्स बेहद कम देखकर सिडको ने लॉटरी की मियाद कई बार बढ़ाई, मगर उसका भी खास असर नहीं हुआ।