नंदुरबार में पानी का संकट, बिल अटकने से ठेकेदारों ने रोका जल जीवन मिशन का काम
नंदुरबार जिले में 622 गांवों में पानी की किल्लत की आशंका है। जल जीवन मिशन की कई योजनाएं अधूरी हैं और भुगतान रुकने से ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है।
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नंदुरबार जिले में आने वाले दिनों में पानी की किल्लत गहरा सकती है। इसी को देखते हुए पूर्व आदिवासी विकास मंत्री डॉ. विजयकुमार गावित की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक हुई। प्रशासन के अंदाज़े के मुताबिक जिले के 622 गांवों में पानी की किल्लत पैदा हो सकती है। इनमें से 100 से ज़्यादा गांवों को टैंकर से पानी देने की ज़रूरत पड़ सकती है।
बैठक में अफसरों से कहा गया कि 'जल जीवन मिशन' के तहत जो प्रोजेक्ट बाकी हैं, उन्हें जल्द से जल्द पूरा करें। फंड की कमी से जो काम अटके हैं, उनका पीछा करने को भी कहा गया। इसके अलावा हैंडपंप लगाने और कुओं से पानी मुहैया कराने जैसे उपाय करने की हिदायत दी गई। प्रशासन इस किल्लत से निपटने के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्ययोजना बना रहा है।
जिले में भीषण पानी की किल्लत का साया बढ़ने से गांव के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। गांवों की नदी और नाले सूख गए हैं। एक घड़ा पानी के लिए लोगों को बहुत भागदौड़ करनी पड़ रही है। इसका असर किसानों और आम लोगों दोनों पर पड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में नंदुरबार विधानसभा के विधायक विजयकुमार गावित की मौजूदगी में बैठक हुई, जिसमें जिले के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं, इस पर कुछ अहम फैसले लिए गए।
बताया गया कि राज्य में सरकार ने सूखा घोषित किया है और पिछले दो महीने से पानी बरसा ही नहीं। इसी वजह से नंदुरबार में पानी की बड़ी किल्लत हो गई है। सूखे के हालात में गांवों के कुएं और नाले सूख गए हैं। सरकार ने जल जीवन योजना के ज़रिए हर घर तक पानी पहुंचाने की कोशिश करने का फैसला किया है। बैठक में यह भी कहा गया कि कुओं का अधिग्रहण करके लोगों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
बैठक से यह बात सामने आई कि नंदुरबार में 51 गांवों में से ज़्यादातर में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जल जीवन मिशन की जलापूर्ति योजना पूरी नहीं हुई है। यह योजना जिला परिषद के जलापूर्ति विभाग और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के ज़रिए चलाई गई है। फिर भी कई गांवों में अब तक पानी पहुंचा ही नहीं है। फिलहाल तापी नदी पर बने प्रकाशा बैराज और विरचक बांध में भरपूर पानी है।
बांध में पानी होने के बावजूद वह लोगों के घरों तक नहीं पहुंच रहा, यह हालात की कड़वी तस्वीर है। योजना के एस्टीमेट में गलतियां थीं, इसलिए संशोधित एस्टीमेट के लिए कई योजनाएं करीब डेढ़ साल से सरकार के दरबार में अटकी पड़ी हैं। जिन योजनाओं का एस्टीमेट ठीक है, उनके बिल अटकने से ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है।
रेलवे लाइन पार करने की इजाज़त और हाइवे विभाग के सड़क किनारे के इस्तेमाल की मंज़ूरी के लिए भी कई गांवों की सामूहिक योजनाएं खराब प्लानिंग की वजह से पूरी नहीं हो सकीं। इसी को लेकर कई लोगों ने सीधे विधायक विजयकुमार गावित के सामने आरोप लगाया कि इस योजना में तंत्र ने सिर्फ ठेकेदारों का पेट भरने के लिए काम किया।
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