नालासोपारा में तीन लाख नाम कटने का दावा, SIR के आंकड़ों पर विपक्ष का भाजपा पर आरोप
नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से करीब तीन लाख नाम कम होने के दावे पर महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
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नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद छिड़ गया है। दावा किया जा रहा है कि सूची से पूरे तीन लाख नाम कम हो गए हैं। यह चर्चा SIR यानी विशेष मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया के आंकड़ों से शुरू हुई है। इसी मुद्दे पर विपक्ष ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
विपक्ष के दावे के मुताबिक उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से लाकर मतदाताओं के नाम नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज करवाए गए थे। आरोप है कि चुनाव से पहले कथित तौर पर किए गए इस रजिस्ट्रेशन का फायदा उठाकर चुनाव में जीत हासिल की गई। रोहित पवार ने जो आंकड़े पेश किए हैं, उनका हवाला देकर मतदाता सूची में हुए बदलावों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि इन आंकड़ों का असली स्रोत क्या है, उनका दायरा कितना है और उनसे ठीक-ठीक क्या नतीजा निकलता है, इसकी अलग से जांच होना जरूरी है। सिर्फ आंकड़ों के आधार पर कोई पक्का नतीजा निकालना ठीक नहीं होगा।
अगर सूची से बड़ी तादाद में नाम कम हुए हैं, तो उसकी वजह समझना जरूरी है। मतदाताओं के एक जगह से दूसरी जगह चले जाने, मृत मतदाताओं की एंट्री, एक ही नाम दो बार दर्ज होने या पात्रता की दूसरी शर्तों की वजह से कुछ नाम हटाए जा सकते हैं। इसलिए सिर्फ नाम कम होने के आंकड़े देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि हटाई गई सभी एंट्री फर्जी थीं।
इस मामले में चुनाव आयोग का जवाब अहम रहेगा। आयोग को मतदाता सूची में हुए बदलावों के आधिकारिक आंकड़े, नाम हटाने की वजहें और जांच की प्रक्रिया के बारे में सफाई देनी होगी।
विपक्ष का आरोप है कि कथित फर्जी वोटर रजिस्ट्रेशन की वजह से ईमानदारी से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के साथ नाइंसाफी हुई। लेकिन नालासोपारा क्षेत्र में असल में कितने नाम हटाए गए, उनमें से कितनी एंट्री अपात्र निकलीं और कथित फर्जी रजिस्ट्रेशन का इस मामले से कोई ताल्लुक है या नहीं, इन सवालों के जवाब आधिकारिक जानकारी और सबूतों से ही साफ हो पाएंगे।
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