मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

नागपुर विभाग के 1397 शिक्षकों की नियुक्ति की दोबारा जांच, 2012 के बाद की भर्तियां शक के घेरे में

शालार्थ आईडी घोटाले की जांच के बाद शिक्षा विभाग अब नागपुर विभाग के 1397 शिक्षकों की नियुक्तियों की दोबारा पड़ताल करेगा। अगले हफ्ते से यह काम शुरू होने की जानकारी है।

नागपुर विभाग के 1397 शिक्षकों की नियुक्ति की दोबारा जांच, 2012 के बाद की भर्तियां शक के घेरे में
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। शालार्थ आईडी घोटाले की जांच के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग को कुछ और शिक्षकों की नियुक्तियों पर भी शक हुआ था। अब अकेले नागपुर विभाग के 1397 शिक्षकों की नियुक्ति की दोबारा जांच की जाएगी। जानकारी है कि यह जांच अगले हफ्ते से शुरू होगी।

शिक्षा विभाग की जांच में यह बात सामने आई थी कि 2012 के बाद कई शिक्षकों की नियुक्तियां नियमों के खिलाफ तरीके से की गई थीं। इसी वजह से इन 1397 शिक्षकों को अलग-अलग सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। उनके कागजात और उनके चयन की प्रक्रिया की पड़ताल होगी।

नागपुर विभागीय शिक्षा मंडल के अध्यक्ष शिवलिंग पटवे ने बताया कि यह जांच अदालत की गाइडलाइन के मुताबिक होगी। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक इस मामले में दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

शालार्थ आईडी घोटाले के बाद अब 2012 से पूर्वी विदर्भ के छह जिलों में हुई शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों की नियुक्तियों की भी जांच चल रही है। इन नियुक्तियों को दी गई व्यक्तिगत मंजूरियों के प्रस्ताव जांचने के लिए प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशकों की अगुवाई में कमेटियां बनी थीं। जानकारी है कि इन कमेटियों ने नागपुर में दो दिन डेरा डालकर करीब एक हजार मामलों की जांच की।

शालार्थ आईडी मामले से शिक्षा विभाग की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां उजागर हुई थीं। इसी पृष्ठभूमि में उपसंचालक समेत कुछ शिक्षाधिकारियों पर कार्रवाई की गई। इसके बाद यह फैसला लिया गया कि शिक्षाधिकारियों ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करके अलग-अलग स्कूलों के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को जो व्यक्तिगत मंजूरियां दी थीं, उनकी भी जांच होगी।

इस जांच में कई बातें देखी गईं। नियुक्त शिक्षकों के पास जरूरी शैक्षणिक योग्यता थी या नहीं, नियुक्ति की प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हुई थी या नहीं, और उम्मीदवारों के जमा किए शैक्षणिक व दूसरे प्रमाणपत्र असली हैं या नहीं। साथ ही संबंधित कर्मचारियों की मौजूदा सेवा स्थिति क्या है, इसकी जानकारी भी ली गई। जरूरी कागजात पूरे थे या नहीं, यह भी परखा गया।

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