नवोदय बैंक घोटाला: 3 करोड़ की जमा रकम बैंक को ट्रांसफर करने की मांग हाई कोर्ट ने ठुकराई
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने आरोपी की वह अर्जी खारिज कर दी जिसमें स्पेशल कोर्ट में जमा 3 करोड़ रुपए नवोदय अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक को ट्रांसफर करने की मांग की गई थी।
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने एक अर्जी ठुकरा दी है जिसमें स्पेशल कोर्ट के पास जमा 3 करोड़ रुपए की रकम नवोदय अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक को ट्रांसफर करने की मांग की गई थी। यह रकम बैंक के साथ वन-टाइम सेटलमेंट यानी ओटीएस के तहत अकाउंट सेटल करने के लिए मांगी गई थी, और यह पूरा मामला नवोदय अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में हुए कथित घोटाले से जुड़ा है।
यह अर्जी आरोपी मनमोहन हिंगल ने लगाई थी। हिंगल पर आरोप है कि उसने बैंक मैनेजमेंट के साथ कथित मिलीभगत करके फर्जी तरीके से लोन हासिल किए।
साल 2019 में हिंगल को जमानत देते वक्त हाई कोर्ट ने उसे शर्त के तौर पर कुल 3 करोड़ रुपए स्पेशल कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया था। इसमें से 1 करोड़ रुपए सात दिन के भीतर और बाकी 2 करोड़ रुपए 16 हफ्तों के भीतर जमा करने थे।
जमानत की शर्त के साथ यह भी साफ किया गया था कि अगर तय समय में यह रकम जमा नहीं की गई तो जमानत रद्द हो जाएगी। इतना ही नहीं, ऐसी स्थिति में स्पेशल कोर्ट आरोपी के खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट भी जारी कर सकती है।
हिंगल ने कोर्ट को बताया कि उसने आदेश का पूरी तरह पालन किया है और पूरे 3 करोड़ रुपए स्पेशल कोर्ट में जमा कर दिए हैं।
इसके बाद हिंगल ने बैंक के साथ ओटीएस के जरिए अपना अकाउंट सेटल करने की मंशा जताई। इसी आधार पर उसने कोर्ट से गुजारिश की कि स्पेशल कोर्ट में जमा 3 करोड़ रुपए नवोदय अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक को ट्रांसफर करने की इजाजत दी जाए।
अर्जी पर सुनवाई के बाद जस्टिस नेरलीकर ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर जमा की गई रकम बैंक को ट्रांसफर करने की इजाजत दी जाती है, तो इससे उस मकसद पर ही असर पड़ेगा जिसके लिए मूल कोर्ट आदेश में यह रकम जमा करने को कहा गया था।
इस मामले में आरोपी की तरफ से एडवोकेट नितिन जायसवाल पेश हुए, जबकि राज्य की तरफ से एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर एन. बी. जावड़े ने पक्ष रखा।
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