शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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03:29 IST

नागपुर पुलिस अब डेटा देखकर तय करेगी स्टाफ, मुंबई की तर्ज पर होगी अर्बन पोलिसिंग

पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटील ने बताया कि हर थाने का काम और जरूरत देखकर स्टाफ और साधन बांटे जाएंगे।

नागपुर पुलिस अब डेटा देखकर तय करेगी स्टाफ, मुंबई की तर्ज पर होगी अर्बन पोलिसिंग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर शहर की पुलिसिंग अब पुराने ढर्रे से हटकर अपराध की संख्या, काम के बोझ और जरूरत के हिसाब से चलाने की तैयारी है। शहर के हर पुलिस थाने का क्राइम ग्राफ, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, इमरजेंसी कॉल और उपलब्ध स्टाफ समेत 19 पैमानों पर अलग से जानकारी जुटाई गई है।

इसी जानकारी के आधार पर तय होगा कि किस पुलिस थाने को ज्यादा स्टाफ, गाड़ियां और दूसरे साधन चाहिए। पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटील ने गुरुवार को 'मीट द प्रेस' में यह बात बताई। उन्होंने साफ किया कि सभी थानों को बराबर स्टाफ देने के बजाय असली काम का बोझ देखकर संसाधन बांटने पर जोर रहेगा।

उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हुडकेश्वर पुलिस थाने की हद में 112 नंबर पर हर महीने करीब 683 इमरजेंसी कॉल आते हैं, जबकि बजाजनगर पुलिस थाने में यह संख्या करीब 110 है। ऐसे में दोनों थानों को बराबर स्टाफ देना ठीक नहीं होगा। नागपुर की भौगोलिक बनावट और अपराधों का स्वरूप देखकर शहरी पुलिसिंग को नए सिरे से खड़ा किया जा रहा है।

मुंबई की तर्ज पर थाने की अलग-अलग जिम्मेदारियां वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, द्वितीय पुलिस निरीक्षक और सहायक पुलिस निरीक्षक के स्तर पर बांटने की योजना है। नांगरे पाटील के मुताबिक पोक्सो और मोटर वाहन कानून के मामलों में सजा का प्रमाण तुलनात्मक रूप से ज्यादा है, लेकिन दूसरे गंभीर अपराधों में भी इसे बढ़ाना पुलिस की प्राथमिकता है। इसके लिए जिन मामलों में सजा की संभावना ज्यादा है, उन्हें तय करके जांच की क्वालिटी सुधारने पर जोर दिया जा रहा है।

पुलिस कर्मचारियों को उनकी पढ़ाई और हुनर देखकर जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। आर्थिक अपराध शाखा में कॉमर्स की पृष्ठभूमि वाले कर्मचारियों को और साइबर अपराधों की जांच के लिए कंप्यूटर साइंस व बीसीए पढ़े कर्मचारियों को तरजीह दी जाएगी। उसी क्षेत्र में लगातार काम कराकर कर्मचारियों को उस विषय का जानकार बनाया जाएगा। महिला सुरक्षा के लिए महिला अधिकारियों की अगुवाई में 12 निर्भया दस्ते काम कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर भीड़ वाले थानों को अतिरिक्त स्टाफ भी दिया जाएगा।

घरफोड़ी और वाहन चोरी की वारदातों के विश्लेषण में सामने आया है कि सुबह 3 से 5 बजे के बीच अपराधी ज्यादा सक्रिय रहते हैं। इसलिए इस वक्त पुलिस की गश्त और असरदार बनाई जाएगी। रिहायशी इलाकों में पुलिस सहायता समूह बनाकर स्थानीय सुरक्षा रक्षकों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

थाने के स्तर पर वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के साथ क्राइम पुलिस निरीक्षक और पुलिस उपनिरीक्षक की जिम्मेदारियां तय करके गश्त और जांच को ज्यादा मजबूत करने की योजना है। बीट पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए शहर के 130 गश्ती दस्तों में मोबाइल ट्रैकिंग उपकरण लगाए जा रहे हैं। इससे गश्ती दस्तों की आवाजाही और संबंधित इलाके में पुलिस की असल मौजूदगी पर नजर रखी जा सकेगी।

शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम पर पुलिस आयुक्त ने कहा कि सिर्फ पुलिस कार्रवाई इसका हल नहीं है। ट्रैफिक इंजीनियर, वास्तुविशारद और नगर रचना के जानकारों की मदद से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था का वैज्ञानिक अध्ययन करके सर्वांगीण ट्रैफिक प्लान बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि नाशिक में काम करते हुए ऐसा प्रयोग किया था। नागपुर में भी सिग्नलों के तालमेल पर काम शुरू है। सभी सिग्नलों में सही तालमेल बैठ गया तो ट्रैफिक का दबाव कम होने में मदद मिलेगी। साथ ही सीसीटीवी के जरिए ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर ज्यादा असरदार कार्रवाई की जाएगी।

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