नागपुर में तीन दिन में करीब 300 लावारिस गाड़ियां हटीं, सड़कों और फुटपाथ को राहत
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
ट्रैफिक पुलिस के महीने भर के शहरव्यापी अभियान में लावारिस गाड़ियों पर कार्रवाई जारी है। करीब 80 गाड़ियों की जानकारी लोगों ने WhatsApp पर दी।
नागपुर की सड़कों और फुटपाथों पर अब थोड़ी खुली जगह दिखने लगी है। ट्रैफिक पुलिस ने महीने भर चलने वाले शहरव्यापी अभियान के पहले तीन दिन में करीब 300 लावारिस गाड़ियां हटा दी हैं। ये वे गाड़ियां हैं जो महीनों से एक ही जगह खड़ी थीं और कोई उन्हें देखने वाला नहीं था।
इस अभियान में आम लोग भी साथ आ रहे हैं। करीब 80 लावारिस गाड़ियों की जानकारी नागरिकों ने WhatsApp के जरिए पुलिस तक पहुंचाई है।
यह खास मुहिम DCP (ट्रैफिक) आदित्य मीरखेलकर के निर्देश पर शुरू हुई है। मकसद उस समस्या से निपटना है जो शहर में सड़कों की जगह को धीरे-धीरे खाती जा रही थी। भीड़भाड़ वाले बाजार इलाकों में खड़ी पुरानी कारें और दोपहिया गाड़ियां स्थायी रुकावट बन गई थीं। इनसे सड़क संकरी हो जाती है, फुटपाथ घिर जाते हैं और पैदल चलने वालों को चलती गाड़ियों के बिल्कुल पास से निकलना पड़ता है।
शुरुआत में ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई सीताबर्डी, कॉटन मार्केट और सदर जैसे बड़े कमर्शियल इलाकों पर केंद्रित की है, जहां सड़क किनारे पार्किंग का दबाव पहले से ज्यादा है। पहले तीन दिन में करीब 300 गाड़ियां हटने के बाद अब विभाग इस कार्रवाई को नागपुर के बाकी हिस्सों में भी ले जाने की तैयारी में है।
मीरखेलकर ने कहा कि आने वाले दिनों में अभियान और तेज किया जाएगा। उनके मुताबिक लावारिस गाड़ियां न सिर्फ ट्रैफिक जाम बढ़ाती हैं, बल्कि हादसों का खतरा भी पैदा करती हैं। मकसद यह है कि सड़कें और पैदल रास्ते लोगों के चलने के लिए खुले रहें और बेकार पड़ी गाड़ियों का अनौपचारिक कबाड़खाना न बन जाएं।
गाड़ी हटाने से पहले मालिक को मौका दिया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस पहले गाड़ी के मालिक का पता लगाने की कोशिश करती है और उसे समझाती है कि वह खुद गाड़ी हटा ले। जहां मालिकाना हक की जानकारी नहीं मिलती या मालिक का पता नहीं चलता, वहां गाड़ी को टो करके ले जाया जा रहा है।
अभियान में जनता की मदद भी ली जा रही है, ताकि ऐसी गाड़ियां पहचानी जा सकें जो लंबे समय से खड़ी हैं और रोजमर्रा में किसी की नजर में नहीं आतीं। WhatsApp पर करीब 80 शिकायतें ट्रैफिक विभाग तक पहुंच चुकी हैं। इससे लगता है कि लोग सार्वजनिक जगह वापस पाने की इस कोशिश में शामिल होना चाहते हैं।
लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने 'नागपुर का ट्रैफिक हीरो' नाम की पहल शुरू की है। महीने भर के अभियान में जो नागरिक सबसे ज्यादा लावारिस गाड़ियों की जानकारी देंगे, उन्हें खास सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया जाएगा। इसका मकसद है कि लोग ट्रैफिक संभालने में सिर्फ दर्शक न रहें, बल्कि पुलिस के साथ भागीदार बनें।
लावारिस गाड़ी की जानकारी देने के तरीके ये हैं। पहला, गाड़ी की फोटो और उसकी सही लोकेशन WhatsApp पर 9356847314 नंबर पर भेजें। दूसरा, WhatsApp पर नागपुर पुलिस का चैटबॉट खोलें, 'Abandoned Vehicle' का विकल्प चुनें और गाड़ी की फोटो व लोकेशन अपलोड करें। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस के लोग बताई गई जगह पर पहुंचेंगे और गाड़ी हटाने की जरूरी कार्रवाई शुरू करेंगे।
सैकड़ों गाड़ियां हट जाने के बाद अभियान ने शहर की भीड़ की एक अनदेखी वजह पर हाथ डाला है। असली परीक्षा यह होगी कि खास मुहिम खत्म होने के बाद भी खाली कराई गई जगहें लावारिस गाड़ियों से मुक्त रहती हैं या नहीं। नागपुर के पैदल चलने वालों और वाहन चालकों के लिए संदेश साफ है कि सड़कें और फुटपाथ चलने के लिए हैं, बेकार गाड़ियों को लंबे समय तक रखने के लिए नहीं।
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