शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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नागपुर में धनतेरस आज: सोना-चांदी की खरीदारी और लक्ष्मी-कुबेर पूजा के शुभ समय

कल्चर PT24 टीम

शुक्रवार 6 नवंबर को धनतेरस मनाया जा रहा है। नागपुर के लिए पूजा मुहूर्त और खरीदारी के चौघड़िया यहां देखिए।

देशभर में आज शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस मनाया जा रहा है। इसी के साथ पांच दिन के दिवाली उत्सव की शुरुआत हो गई है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। इसे धन, समृद्धि, अच्छी सेहत और नई शुरुआत से जोड़ा जाता है।

इस मौके पर परिवार परंपरा के मुताबिक सोना, चांदी, गहने, सिक्के, बर्तन और दूसरी कीमती चीजें खरीदते हैं। मान्यता है कि कीमती सामान घर लाना समृद्धि और अच्छी किस्मत की निशानी है। श्रद्धालु भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी करते हैं और अच्छी सेहत, आर्थिक स्थिरता और खुशहाली का आशीर्वाद मांगते हैं।

इस साल तारीख को लेकर थोड़ी उलझन रही, क्योंकि त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर की सुबह तक चलेगी। लेकिन धनतेरस की पूजा का शुभ प्रदोष काल 6 नवंबर को पड़ रहा है, इसलिए त्योहार आज ही मनाया जा रहा है।

हिंदू पंचांग के हिसाब से कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को शुरू होकर 7 नवंबर तक रहेगी। तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू हुई और 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे खत्म होगी।

नागपुर के श्रद्धालुओं के लिए शाम का प्रदोष काल धनतेरस पूजा का सबसे अहम समय माना गया है। शहर के हिसाब से निकाली गई पंचांग गणना के मुताबिक नागपुर में लक्ष्मी-कुबेर पूजा का शुभ समय करीब शाम 6:07 बजे से रात 8:06 बजे तक है। प्रदोष काल शाम 5:35 बजे से रात 8:08 बजे तक रहेगा। पंचांग की गणना और स्थानीय परंपराओं के बीच मुहूर्त में थोड़ा फर्क हो सकता है।

सोना-चांदी खरीदना धनतेरस की सबसे लोकप्रिय परंपराओं में से एक है। कई परिवार इस दिन सोने के सिक्के, चांदी के गहने, कीमती धातु के बर्तन और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदते हैं। नागपुर के लिए निकाले गए खरीदारी के समय में ये चौघड़िया शुभ बताए गए हैं: शुभ चौघड़िया सुबह 11:57 से दोपहर 1:21 बजे तक, चर चौघड़िया शाम 4:11 से 5:35 बजे तक और लाभ चौघड़िया रात 8:46 से 10:21 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त भी अहम खरीदारी के लिए परंपरा से शुभ माना जाता है, पर सही समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग में देख लेना चाहिए।

सोना-चांदी के अलावा भी कई चीजें इस दिन खरीदी जाती हैं। इनमें पीतल और तांबे के बर्तन, घर के लिए नए बर्तन, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, झाड़ू, धनिया के बीज, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान शामिल हैं। झाड़ू को परंपरा से देवी लक्ष्मी के स्वागत से जोड़ा जाता है, जबकि धनिया के बीज पारंपरिक पूजा में इस्तेमाल होते हैं। कुछ परिवार धनतेरस पर लोहा और नुकीली चीजें खरीदने से बचते हैं। ये बातें धार्मिक रीति-रिवाजों पर आधारित हैं और हर घर में अलग हो सकती हैं।

हिंदू पौराणिक कथा के मुताबिक समुद्र मंथन के वक्त भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर निकले थे। उन्हें आयुर्वेद, सेहत और इलाज के देवता के रूप में पूजा जाता है। देवी लक्ष्मी धन और समृद्धि की प्रतीक हैं, और भगवान कुबेर को धन का रखवाला माना जाता है। इसलिए धनतेरस सिर्फ सोना-चांदी खरीदने का दिन नहीं है, इस दिन अच्छी सेहत, आर्थिक खुशहाली और समृद्धि की दुआ भी की जाती है।

शाम को दीया जलाना भी इस दिन की एक खास रस्म है। इसे यम दीपदान कहते हैं। इसमें घर के मुख्य दरवाजे के पास तेल का दीया जलाया जाता है, परंपरा के मुताबिक उसका मुंह दक्षिण की ओर रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह रस्म अकाल मृत्यु से बचाव और परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र और भलाई की प्रार्थना के लिए की जाती है।

दिवाली की तैयारियों के बीच धनतेरस समृद्धि का स्वागत करने, नई शुरुआत मनाने और सेहत व खुशी की प्रार्थना करने का मौका है।

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