नागपुर में 1300 गणेश पंडालों की अचानक जांच करेगा मनपा अग्निशमन विभाग
गणेशोत्सव के दौरान नागपुर मनपा ने पंजीकृत मंडलों के लिए आठ सुरक्षा नियम अनिवार्य किए, औचक निरीक्षण होंगे
गणेशोत्सव में पंडालों में उमड़ती भीड़ को देखते हुए नागपुर मनपा का अग्निशमन विभाग सतर्क हो गया है। शहर के 1,300 पंजीकृत गणेश मंडलों को विभाग ने फायर अलर्ट भेजा है और साफ कहा है कि आग से बचाव के नियम सख्ती से पाले जाएं। विभाग की टीमें पंडालों का औचक निरीक्षण करेंगी, और जहां लापरवाही मिलेगी वहां कार्रवाई होगी।
मनपा के मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजेंद्र उचके ने गणेश मंडलों से अपील की है कि सजावट और झांकियों में जितना ध्यान दिया जाता है, उतना ही अग्नि सुरक्षा पर भी दिया जाए। इसी को लेकर विभाग ने आठ जरूरी नियम तय किए हैं, जिनका पालन हर पंडाल को करना होगा।
पहला नियम है कि हर पंडाल में कम से कम दो अग्निशामक यंत्र चालू हालत में रखे जाएं, और उनका प्रेशर व वैधता समय-समय पर चेक की जाए। दूसरा, आपात स्थिति के लिए पंडाल में कम से कम 200 लीटर पानी और बाल्टियां तैयार रखनी होंगी। तीसरा नियम प्रवेश-निकास और आसपास के रास्तों को हमेशा खुला रखने का है, इनमें किसी तरह की रुकावट नहीं होनी चाहिए।
चौथा, पंडाल में अलग और साफ फायर एग्जिट होना जरूरी है, और उसके रास्ते में कुर्सियां, प्रसाद के स्टॉल या सजावट का सामान रखकर उसे बंद नहीं किया जा सकता। पांचवां नियम ज्वलनशील चीजों पर रोक का है, यानी केरोसिन के दीये, मोमबत्ती, सिगड़ी, गैस सिलेंडर, पटाखे, विस्फोटक सामान, सूखी लकड़ी और घास जैसी चीजें पंडाल में नहीं रखी जा सकतीं।
छठा नियम बिजली की सुरक्षा से जुड़ा है, शॉर्ट सर्किट का खतरा कम करने के लिए सिर्फ प्रमाणित और ISI मार्क वाले बिजली के उपकरण और तार ही इस्तेमाल करने होंगे, और अस्थायी वायरिंग, मल्टीप्लग या एक्सटेंशन बोर्ड से ओवरलोडिंग से बचना होगा। सातवां नियम मुख्य द्वार के आकार का है, दमकल गाड़ियां आसानी से अंदर आ सकें इसलिए द्वार की ऊंचाई कम से कम 4.5 मीटर और चौड़ाई 6 मीटर रखने को कहा गया है।
आठवां नियम नो-पार्किंग और आग से बचाव के इंतजाम का है, आपातकालीन वाहनों के रास्ते में कोई भी गाड़ी खड़ी नहीं की जा सकेगी। पंडाल में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों पर फायर-रेटार्डेंट कोटिंग होनी चाहिए और वायरिंग सुरक्षित होनी चाहिए, इसके लिए वायरिंग का काम लाइसेंस प्राप्त ठेकेदार से ही कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अग्निशमन विभाग ने यह भी साफ किया है कि पंडाल में रखे अग्निशामक यंत्र सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होने चाहिए, बल्कि मंडल के स्वयंसेवकों को इनके इस्तेमाल की बुनियादी ट्रेनिंग भी दी जानी चाहिए। मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजेंद्र उचके के मुताबिक विभाग की टीमें पंडालों का औचक निरीक्षण करती रहेंगी, और जिस मंडल में नियमों की अनदेखी पाई गई, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।