महाराष्ट्र में विधान परिषद की 5 शिक्षक-पदवीधर सीटों का चुनाव कार्यक्रम घोषित
औरंगाबाद, पुणे और नागपुर के पदवीधर तथा अमरावती और पुणे के शिक्षक मतदारसंघों में 23 अक्टूबर को वोटिंग, 27 अक्टूबर को नतीजे।
महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच शिक्षक और पदवीधर सीटों के लिए चुनाव का पूरा शेड्यूल सामने आ गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने तीन पदवीधर मतदारसंघों और दो शिक्षक मतदारसंघों के लिए तारीखें तय कर दी हैं।
जिन सीटों पर चुनाव होना है उनमें औरंगाबाद विभाग पदवीधर, पुणे विभाग पदवीधर और नागपुर विभाग पदवीधर, ये तीन मतदारसंघ शामिल हैं। इनके अलावा अमरावती विभाग शिक्षक और पुणे विभाग शिक्षक, इन दो सीटों पर भी वोटिंग होगी। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी इन पांचों मतदारसंघों के लिए वोटर रजिस्ट्रेशन की जानकारी डाली गई है।
इन पांचों सीटों पर मौजूदा एमएलसी का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है। इसी वजह से समय रहते नए प्रतिनिधि चुनने के लिए यह चुनाव कराया जा रहा है।
चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर 2026 को जारी होगी और उसी दिन से नामांकन भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद 7 अक्टूबर को नामांकनों की जांच होगी, और उम्मीदवारों के पास 9 अक्टूबर तक अपना नाम वापस लेने का मौका रहेगा। इसके बाद ही तय होगा कि मैदान में असल में कौन कौन उम्मीदवार बचे हैं।
पांचों विधान परिषद मतदारसंघों में वोटिंग 23 अक्टूबर 2026 को होगी। मतदान का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 4 बजे तक रखा गया है। पदवीधर और शिक्षक मतदारसंघों के लिए अलग अलग वोटर लिस्ट तैयार की गई हैं।
पदवीधर मतदारसंघ में वोट डालने के लिए उस मतदारसंघ का सामान्यतः निवासी होना और तय तारीख से पहले कम से कम तीन साल से ग्रेजुएट होना जरूरी है। वहीं शिक्षक मतदारसंघ के लिए पात्रता की शर्त यह है कि उम्मीदवार ने संबंधित मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्था में पिछले छह साल में कुल मिलाकर कम से कम तीन साल पढ़ाया हो।
वोटिंग के बाद 27 अक्टूबर 2026 को मतगणना होगी, यानी इन पांचों मतदारसंघों के नतीजे उसी दिन साफ हो जाएंगे।
पांच विधान परिषद सीटों का चुनाव कार्यक्रम जाहिर होने के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज होने की उम्मीद है। बड़े राजनीतिक दल उम्मीदवारों की तलाश, मतदारसंघवार तैयारी और स्थानीय स्तर पर बैठकें शुरू कर सकते हैं। शिक्षक और पदवीधर मतदारसंघों की वोटर बनावट बाकी चुनावों से अलग होती है, इसलिए उम्मीदवारों के लिए वोटर रजिस्ट्रेशन, संपर्क और प्रचार की प्लानिंग खास तौर पर अहम रहेगी। 29 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद इस चुनाव की राजनीतिक तस्वीर और साफ होगी।
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