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नागपुर की सड़कों पर 32.42 लाख गाड़ियां, रोज 475 नई जुड़ रहीं

नागपुर में वाहनों की तादाद 32.42 लाख पहुंच गई है और हर दिन औसतन करीब 475 नई गाड़ियां रजिस्टर हो रही हैं।

नागपुर की सड़कों पर 32.42 लाख गाड़ियां, रोज 475 नई जुड़ रहीं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चौड़ी सड़कों और आसान ट्रैफिक के लिए जाना जाने वाला नागपुर अब जाम की गिरफ्त में आता जा रहा है। ऑरेंज सिटी में वाहनों की संख्या बढ़कर 32.42 लाख हो गई है। इससे सड़कों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और वाहन चालकों के लिए ट्रैफिक जाम रोज की परेशानी बन गया है।

जिले के तीनों क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) के रजिस्ट्रेशन आंकड़ों से हालात का अंदाजा लगता है। सबसे ज्यादा 15.08 लाख गाड़ियां सिटी RTO (MH-31) में दर्ज हैं। ग्रामीण RTO (MH-40) में 9.19 लाख और ईस्ट RTO (MH-49) में 7.83 लाख गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं।

कुल संख्या से भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि गाड़ियां किस रफ्तार से बढ़ रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले छह साल में हर साल होने वाले रजिस्ट्रेशन में तेज उछाल आया है। इससे सड़क की जगह, पार्किंग और ट्रैफिक संभालने के इंतजाम पर मांग बढ़ती जा रही है।

छह साल में नए रजिस्ट्रेशन करीब 86 फीसदी बढ़े। तीनों RTO ने मिलकर वित्त वर्ष 2025-26 में 1,75,282 गाड़ियां रजिस्टर कीं, जबकि 2020-21 में यह आंकड़ा 94,286 था।

ईस्ट RTO में सालाना रजिस्ट्रेशन 2020-21 के 38,272 से बढ़कर 2025-26 में 70,673 हो गए, यानी करीब 85 फीसदी का उछाल। सिटी RTO में अनुपात के हिसाब से और बड़ी बढ़त दिखी। वहां रजिस्ट्रेशन 16,790 से बढ़कर 35,492 हो गए, यानी छह साल में दोगुने से भी ज्यादा। ग्रामीण RTO में सालाना रजिस्ट्रेशन 39,224 से बढ़कर 69,117 हुए।

यह रफ्तार चालू वित्त वर्ष में भी जारी है। 2026-27 के पहले छह महीनों में ही तीनों RTO ने 86,648 गाड़ियां रजिस्टर कीं। इसका मतलब है कि रोज औसतन करीब 475 नई गाड़ियां सड़कों पर आ रही हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या शहर की सड़कें, पार्किंग और ट्रैफिक कंट्रोल के इंतजाम इस बढ़ती मांग के साथ चल पाएंगे।

बाहर की गाड़ियों का भी दबाव है। ये आंकड़े सिर्फ नागपुर जिले में रजिस्टर हुई गाड़ियों के हैं। पड़ोसी जिलों और दूसरे राज्यों से रोज शहर में आने वाली हजारों गाड़ियां इसमें शामिल नहीं हैं।

रोजगार, पढ़ाई, इलाज, व्यापार और कारोबार के लिए नागपुर पूरे विदर्भ और उससे आगे के लोगों को खींचता है। कई लोग यहीं बस जाते हैं और कई काम के लिए रोज आते-जाते हैं। उनकी गाड़ियां उन सड़कों पर बोझ बढ़ाती हैं जिन पर पहले से स्थानीय गाड़ियां तेजी से बढ़ रही हैं। खासकर बाजार वाले इलाकों, बड़े चौराहों, शिक्षा और दूसरे संस्थानों के आसपास और मुख्य रास्तों पर सड़क की जगह के लिए होड़ मची रहती है।

DCP (ट्रैफिक) आदित्य मिरखेलकर ने माना कि गाड़ियों की बढ़ती संख्या जाम की बड़ी वजहों में से एक है। साथ ही उनका कहना है कि इसी आकार के दूसरे शहरों के मुकाबले नागपुर का ट्रैफिक अब भी बेहतर है। मिरखेलकर ने कहा, "इसी आकार के दूसरे शहरों से तुलना करें तो नागपुर का ट्रैफिक अब भी बेहतर है। गाड़ियों की बढ़ती संख्या के अलावा बाहर से आकर बसने वाले लोग, इंफ्रास्ट्रक्चर के काम और सही पार्किंग की कमी इस समस्या के पीछे हैं। ठीक ट्रैफिक मैनेजमेंट के साथ पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल शहर का जाम कम कर सकता है।"

सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर के काम से कुछ समय के लिए अड़चनें बनती हैं। व्यस्त सड़कों के किनारे जहां-तहां खड़ी गाड़ियां चलते ट्रैफिक के लिए जगह घटा देती हैं। नए बाशिंदों और रोज आने वालों की वजह से मौजूदा सड़कों पर दबाव और बढ़ता है।

अब मुख्य सड़कों, व्यस्त चौराहों और बाजार वाले रास्तों पर जाम की शिकायतें अक्सर आती हैं। पीक आवर के बाहर भी वाहन चालकों को धीमे ट्रैफिक से जूझना पड़ता है, जिससे सफर का समय, ईंधन का खर्च और झुंझलाहट बढ़ती है। फ्लाईओवर और सड़क चौड़ी करने जैसे कामों से कई जगह कनेक्टिविटी सुधरी है, लेकिन गाड़ियों के लगातार जुड़ते जाने से इनका फायदा बेअसर होने का खतरा है।

ट्रैफिक एक्सपर्ट मानते हैं कि नागपुर को सिर्फ सड़कें बढ़ाने से आगे सोचना होगा और शहरी आवाजाही के लिए ज्यादा व्यापक तरीका अपनाना होगा। बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से निजी कारों और दोपहिया पर निर्भरता घट सकती है। सिग्नलों में बेहतर तालमेल और गलत पार्किंग पर सख्ती से मौजूदा सड़कें ज्यादा असरदार ढंग से काम कर सकती हैं। अधिकारियों को स्थायी बॉटलनेक पहचानने, बड़े चौराहों पर ट्रैफिक की चाल परखने और यह पक्का करने की जरूरत है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट पार्किंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़ाव के साथ बनें।

गाड़ियों की बढ़ती संख्या के कारण ये कदम और जरूरी हो गए हैं। मांग को संभाले बिना नई सड़कें और फ्लाईओवर भी टिकाऊ राहत नहीं दे पाएंगे। जिस शहर को कभी अपने आसान ट्रैफिक पर नाज था, उसके सामने अब चुनौती यह है कि जाम रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा न बन जाए। 2026-27 की पहली छमाही में रोज करीब 475 नई गाड़ियां रजिस्टर हो रही हैं, इसलिए नागपुर की ट्रैफिक रणनीति को वाहनों की आबादी जितनी तेजी से बदलना होगा।

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