मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

नागपुर हिरासत में मौत: CID ने संभाली जांच, पोस्टमार्टम में दिल का दौरा पड़ने के संकेत

28 साल के सुमेध राजेंद्र गजभिये की मौत की जांच महाराष्ट्र CID ने अपने हाथ में ले ली है। शुरुआती फोरेंसिक नतीजे अचानक दिल के दौरे की ओर इशारा करते हैं।

नागपुर में 28 साल के सुमेध राजेंद्र गजभिये की मौत के मामले में बुधवार को डॉक्टरों ने शुरुआती फोरेंसिक नतीजे बताए। इनके मुताबिक मौत की मुख्य वजह अचानक आया दिल का दौरा लग रही है। लेकिन मेडिकल जांच करने वालों ने उसके शरीर पर अंदरूनी छोटी चोटें भी पाई हैं। इन चोटों का असर कितना था और वे किस तरह की थीं, यह विस्तृत फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट से तय होगा।

मामले की प्रकृति को देखते हुए महाराष्ट्र राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (CID) ने जांच औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले ली है। अपर पुलिस महानिदेशक (राज्य CID) सुनील रामानंद ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि हिरासत में मौत के मामलों की standard operating procedures का पूरी सख्ती से पालन किया जा रहा है। नागपुर में चल रही जांच की सीधी निगरानी SP (CID) अभिजीत धाराशिवकर करेंगे।

पुलिस के बताए घटनाक्रम के मुताबिक नरसाला का रहने वाला गजभिये कथित तौर पर दीपक पाटिल नाम के एक साथी के साथ मिला हुआ था। आरोप है कि दोनों डिलीवरी एजेंट बनकर बेलतरोड़ी पुलिस स्टेशन से मुश्किल से 500 मीटर दूर पृथ्वीराज नगर में उषा धर्मिक के घर में घुसे। गजभिये ने कथित तौर पर चाकू दिखाकर उषा धर्मिक को धमकाया और उनकी सोने की चेन छीन ली।

पीड़िता के परिवार ने शोर मचाया तो आसपास के लोगों ने दोनों का पीछा किया। पाटिल भाग निकलने में कामयाब रहा, लेकिन भीड़ ने गजभिये को घेर लिया और कथित तौर पर उसकी पिटाई की। गश्त पर तैनात पुलिस के एक बीट मार्शल ने उसे बचाया और बेलतरोड़ी पुलिस स्टेशन ले आया। स्टेशन पहुंचने के कुछ ही देर बाद उसने सीने में तेज दर्द की शिकायत की। उसे फौरन नागपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (GMCH) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मंगलवार को करीब 4:20 बजे उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना को 24 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, फिर भी पुलिस "दीपक पाटिल" का पता नहीं लगा पाई है। उस नाम का कोई क्राइम रिकॉर्ड या डेटाबेस में मेल खाती एंट्री नहीं मिली। इसलिए जांचकर्ताओं को शक है कि गजभिये ने मरने से पहले अपने साथी को बचाने के लिए फर्जी नाम बताया होगा।

CID की जांच पूरे घटनाक्रम को परखेगी। इसमें इलाज मिलने में देरी को लेकर लगे आरोप भी शामिल हैं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि मारपीट का और दिल के दौरे का मौत में अलग-अलग कितना असर रहा।

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