मुरगुड में पहलवानों को खाशाबा जाधव की जीवनी भेंट, संजय दुधाणे बोले- यहीं से निकलेंगे वारिस
भारत को कुश्ती में पहला ओलिंपिक पदक दिलाने वाले खाशाबा जाधव की जीवनी 'ऑलिम्पिकवीर खाशाबा' मुरगुड के पहलवानों को दी गई।
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भारतीय कुश्ती को ओलिंपिक पदक दिलाने वाले पहले पहलवान खाशाबा जाधव के जीवन की कहानी नई पीढ़ी के पहलवानों तक पहुंचे, इसी मकसद से लोकनेते सदाशिवराव मंडलिक राष्ट्रीय कुश्ती संकुल के पहलवानों को चरित्र पुस्तक 'ऑलिम्पिकवीर खाशाबा' भेंट की गई। पुस्तक के लेखक संजय दुधाणे ने इस मौके पर कहा कि खाशाबा जाधव के बाद महाराष्ट्र को कुश्ती में कोई ओलिंपिक पदक नहीं मिला है। उन्हें भरोसा है कि अब खाशाबा के वारिस मुरगुड से चमकेंगे।
कार्यक्रम मुरगुड में हुआ। इसमें विश्व स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली अमृता पुजारी समेत अखाड़े के सात राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवानों का सत्कार संजय दुधाणे के हाथों किया गया। मौके पर उपनगराध्यक्ष रेखा दीदी मांगले, पूर्व नगराध्यक्ष नामदेवराव मेंडके, पूर्व उपनगराध्यक्ष जयसिंगराव भोसले, पूर्व पार्षद राहुल शिंदे, दीपक शिंदे और राजेंद्र कांबळे मौजूद थे। पार्षद दत्तात्रय मंडलिक, पूर्व प्राचार्य महादेव कानकेकर, प्रकाश तिराळे, दयानंद खतकर और राजेंद्र मकोटे समेत कई मान्यवर भी आए थे।
कार्यक्रम की शुरुआत में संजय दुधाणे ने खाशाबा जाधव की पदक जीत की उपलब्धि को याद किया। इसके बाद उन्होंने पदक जीतने वाली महिला पहलवानों अमृता पुजारी, नंदिनी साळुंखे, स्वाती शिंदे और तन्वी मगदूम से बातचीत की।
दुधाणे ने कहा कि खेल में कामयाबी के लिए शारीरिक ताकत के साथ मानसिक मजबूती और सकारात्मक सोच भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि हर खिलाड़ी और हर कोच इन बातों को ध्यान में रखे। कुश्ती कोच दादासो लवटे ने भी खाशाबा जाधव की जीवनी की अहमियत पर जोर दिया। उनके मुताबिक यह जीवनी सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि जिंदगी में संघर्ष कर रहे हर इंसान के लिए प्रेरणा बनेगी।
'ऑलिम्पिकवीर खाशाबा' 166 पन्नों की किताब है और इसमें खाशाबा जाधव की दुर्लभ तस्वीरें शामिल हैं। इसकी प्रस्तावना वरिष्ठ लेखक दिवंगत य. दि. फडके ने लिखी है। प्रा. संजय दुधाणे ने गहरी रिसर्च करके खाशाबा के जीवन का सफर शब्दों में उतारा है।
महाराष्ट्र के नामी अखाड़ों के खिलाड़ियों को यह किताब भेंट करने की पहल शुरू की गई है। इस पहल के तहत कोल्हापुर, पुणे, कराड और सातारा के खिलाड़ियों को भी किताब दी जा चुकी है।
कार्यक्रम का स्वागत और प्रस्तावना भाषण दादासो लवटे ने किया। संचालन बटू जाधव ने संभाला और स्वाती शिंदे ने आभार माना।
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