मुरासू के असर से कोंकण, पश्चिम महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के कई जिलों में बारिश का अलर्ट
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दिवाली की तैयारियों के बीच भारतीय मौसम विभाग ने 4 नवंबर को कई जिलों में बिजली कड़कने के साथ हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है।
दिवाली की तैयारियां चल रही हैं और इसी बीच महाराष्ट्र के मौसम में फिर बदलाव के आसार दिख रहे हैं। बंगाल की खाड़ी में बना मुरासू चक्रवात अब कमजोर पड़ रहा है, लेकिन उसका असर राज्य के कुछ हिस्सों पर पड़ सकता है।
भारतीय मौसम विभाग ने 4 नवंबर के लिए कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के कुछ जिलों में बारिश का अनुमान दिया है। कुछ जगहों पर बिजली कड़कने के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ सकती हैं। बाकी महाराष्ट्र में आसमान पर बादल रहेंगे और तापमान ऊपर नीचे होता रहेगा।
कोंकण में सब जगह एक जैसा मौसम नहीं रहेगा। पालघर, ठाणे, मुंबई और रायगढ़ में मौसम सूखा रहने की संभावना है, यानी यहां के लोगों को बारिश से राहत मिल सकती है। रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में हालात अलग होंगे। इन दोनों जिलों में हल्की बारिश के साथ बादल गरजने का अनुमान है, इसलिए यहां के लोगों को मौसम का बदलाव देखकर अपना काम तय करना चाहिए।
पश्चिम महाराष्ट्र में पुणे शहर और पुणे घाटमाथा इलाके में मौसम सूखा रह सकता है। वहीं कोल्हापुर, कोल्हापुर घाटमाथा, सातारा, सांगली और सोलापुर में बादल गरजने के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। स्थानीय मौसम के हिसाब से बारिश की मात्रा कम ज्यादा हो सकती है। आने वाले कुछ दिनों में पश्चिम महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों में फिर से मौसम सूखा रहने का अनुमान है।
उत्तर महाराष्ट्र के धुले, नंदुरबार, जलगांव, नासिक और अहिल्यानगर में बारिश की संभावना नहीं है। यहां मुख्य रूप से सूखा मौसम रहेगा, पर दिन और रात के तापमान में फर्क महसूस हो सकता है। खासकर रात में हवा में ठंडक रह सकती है।
मराठवाड़ा में छत्रपति संभाजीनगर, जालना, परभणी, हिंगोली, नांदेड़ और लातूर में बादल गरजने के साथ हल्की बौछारों का अनुमान है। बीड और धाराशिव में मौसम सूखा रहने की संभावना है। यानी मराठवाड़ा में कहीं बारिश तो कहीं सूखा, मिला जुला नजारा रहेगा।
विदर्भ के सभी जिलों में फिलहाल बारिश की संभावना नहीं है, ऐसा मौसम विभाग ने बताया है। अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर और गढ़चिरौली में मौसम सूखा रह सकता है। फिर भी यहां तापमान में लगातार उतार चढ़ाव का अनुमान है, इसलिए दिन और रात के मौसम में फर्क लग सकता है।
अब मुरासू की बात। बंगाल की खाड़ी में बना यह तीव्र चक्रवात मंगलवार 3 नवंबर की सुबह तड़के आंध्र प्रदेश के तट से टकराया। नेल्लोर और नरसापूर के बीच ओंगोल के पास इसने जमीन पर दस्तक दी। उस वक्त हवाएं 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थीं और इलाके में तेज बारिश भी दर्ज की गई।
जमीन पर आने के बाद चक्रवात की ताकत धीरे धीरे घट रही है। उत्तर की तरफ बढ़ रहे इस सिस्टम का केंद्र ओंगोल से 30 किलोमीटर उत्तर और बापटला से 40 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में था। मौसम विभाग की जानकारी के मुताबिक आज 4 नवंबर को इसकी ताकत और घटेगी और यह कम दबाव के क्षेत्र में बदल जाएगा।
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