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मुंबई यूनिवर्सिटी और ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी का मिलकर 'कूल क्रायम्ब' क्लाइमेट प्रोजेक्ट शुरू

मुंबई विश्वविद्यालय और ब्रिटेन के ब्रिस्टल विश्वविद्यालय ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर टिकाऊ उपाय खोजने वाला संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू किया है।

मुंबई यूनिवर्सिटी और ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी का मिलकर 'कूल क्रायम्ब' क्लाइमेट प्रोजेक्ट शुरू तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर टिकाऊ उपाय तैयार करने के मकसद से मुंबई विश्वविद्यालय और ब्रिटेन के ब्रिस्टल विश्वविद्यालय ने मिलकर 'कूल क्लाइम्ब' नाम का संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह प्रोजेक्ट ब्रिटिश काउंसिल-एचएसबीसी की 'क्लाइमेट स्किल्स ग्लोबल कोलैबोरेशन ग्रांट्स' के तहत चल रहा है।

इस प्रोजेक्ट के जरिए युवाओं को हरित कौशल की ट्रेनिंग दी जा रही है, हरित उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है और समुदाय आधारित जलवायु कार्रवाई को रफ्तार दी जा रही है।

प्रोजेक्ट मुंबई विश्वविद्यालय के जलवायु परिवर्तन और स्थिरता अध्ययन केंद्र के तालमेल से चलाया जा रहा है। डॉ. अपर्णा फडके इसकी अगुवाई कर रही हैं, जबकि प्रो. इंदू जॉर्ज और प्रो. स्मिता शुक्ला सह-समन्वयक हैं। ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के ब्रिग्सटो इंस्टिट्यूट और कैबट इंस्टिट्यूट का भी इस पहल में सहयोग है।

इसके तहत मुंबई महानगर क्षेत्र और कोंकण के छह समुदाय सह-निर्माण प्रयोगशालाओं के जरिए पर्यावरण की समस्याओं का अध्ययन किया जा रहा है। इसके आधार पर स्थानीय जरूरतों के हिसाब से उपाय विकसित किए जा रहे हैं। भारत में अब तक 41 संस्थाएं इस पहल से जुड़ चुकी हैं।

अब तक हुए काम और हासिल कामयाबी का ब्योरा रखने के लिए 'री रूट शोकेस' नाम का खास कार्यक्रम हुआ। इसकी अध्यक्षता मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवींद्र कुलकर्णी ने की। उन्होंने ठोस कचरा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से पार पाने के लिए सबके मिलकर कोशिश करने की अहमियत पर जोर दिया। कार्यक्रम में ब्रिस्टल विश्वविद्यालय की प्रो. एग्नेस नायरन और ब्रिटिश काउंसिल की राशी जैन व अनू थम्पी भी मौजूद थीं।

ब्रिस्टल के समुदायों की नुमाइंदगी करने वाले पांच युवा प्रतिनिधि 12 से 16 अक्टूबर के बीच मुंबई विश्वविद्यालय आए थे। उनके साथ प्रो. लियांग फॉन्ग वाँग, डॉ. गोया विल्सन और डॉ. पेन विल्यम्स भी थे। इस दौरे में ब्रिस्टल के प्रतिनिधियों ने मुंबई के जुहू मोरा गांव और ठाणे ठोस कचरा प्रबंधन, इन दो सह-निर्माण प्रयोगशालाओं का दौरा किया और स्थानीय लोगों से सीधे बात की।

अब बारी मुंबई विश्वविद्यालय की है। 29 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच विश्वविद्यालय के पांच विद्यार्थी प्रतिनिधि डॉ. अपर्णा फडके की अगुवाई में ब्रिस्टल जाएंगे। वहां वे समुदाय आधारित जलवायु अनुकूलन के तरीकों का अध्ययन करेंगे और अपने अनुभव साझा करेंगे।

'री-रूट' कार्यक्रम में हरित कौशल की कमी, पर्यावरण के अनुकूल नए विचार और जलवायु परिवर्तन के साथ तालमेल बिठाने की समुदायों की क्षमता जैसे विषयों पर चर्चा सत्र और वर्कशॉप हुई। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग से युवाओं को सीधे अनुभव से सीखने का मौका मिलेगा।

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