रविवार, 1 नवंबर 2026

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लालबाग के राजा के प्रसाद से रोशन होंगे BMC के हॉस्पिटल्स, जानिए क्या है पूरी स्कीम

लालबाग के राजा के प्रसाद से रोशन होंगे BMC के हॉस्पिटल्स, जानिए क्या है पूरी स्कीम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

गणेशोत्सव के दौरान मंदिर परिसर से निकलने वाले कचरे को बायोमिथेनेशन के जरिए ऊर्जा में बदला जाएगा, जिसका इस्तेमाल बीएमसी के चार बड़े अस्पतालों में होगा।

गणेशोत्सव के दौरान कचरे को सही तरीके से मैनेज करने और उसे किसी अच्छे काम में लगाने के मकसद से बीएमसी और लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल ने हाथ मिलाया है। इस नई स्कीम के तहत खाने-पीने की चीजों और सेंद्रिय कचरे को प्रोसेस करके उससे ऊर्जा बनाई जाएगी, और यही ऊर्जा अस्पतालों में बिजली सप्लाई के लिए इस्तेमाल होगी। यानी गणपति बप्पा को चढ़ने वाले प्रसाद और फूल-पत्तियों से निकलने वाला कचरा सीधे फेंका नहीं जाएगा, बल्कि उसे एक तय प्रोसेस से गुजारकर बिजली बनाने के काम में लाया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट को नाम दिया गया है 'प्रसाद टू पावर'।

गणेशोत्सव के दिनों में मंदिर परिसर से रोज करीब ८ से १० टन कचरा निकलने की उम्मीद है। इस गीले कचरे को पुराने तरीके से यानी सीधे फेंकने या डंप करने की बजाय खास गाड़ियों के जरिए रोजाना इकट्ठा किया जाएगा। इकट्ठा किए गए इस कचरे को फिर बीएमसी के नायर अस्पताल, कस्तुरबा अस्पताल, जीटीबी अस्पताल और सायन अस्पताल में लगे बायोमिथेनेशन प्रोजेक्ट्स तक पहुंचाया जाएगा, जहां उसे प्रोसेस कर ऊर्जा तैयार की जाएगी।

मिली जानकारी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट की प्रोसेस कैपेसिटी २ मेट्रिक टन है, यानी एक बार में इतना कचरा प्रोसेस किया जा सकेगा। इसके तहत ११ दिनों में कुल ८० मेट्रिक टन सेंद्रिय कचरे पर प्रोसेस किया जाएगा, और अंदाजन ७,७४४ यूनिट्स ऊर्जा बनाने का टारगेट रखा गया है। हालांकि यह प्रोजेक्ट कितना कामयाब होता है, यह आने वाले वक्त में ही साफ हो पाएगा। कचरे से तैयार होने वाली इस ऊर्जा का इस्तेमाल मरीजों के वार्ड, कॉरिडोर और अस्पताल की पब्लिक जगहों पर लाइट जलाने के लिए किया जाएगा, ताकि अस्पताल का कुछ बिजली का खर्च इससे पूरा हो सके। इस प्रोजेक्ट को चलाने और उसकी देखभाल का जिम्मा बीएमसी की नियुक्त की गई एजेंसी मे. एरोकेअर एव्हिएशन प्रा. लि. को दिया गया है।

बड़े सार्वजनिक गणेशोत्सव के दौरान बनने वाले सेंद्रिय कचरे को किसी उपयोगी काम में कैसे लगाया जा सकता है, इसकी एक मिसाल यह प्रोजेक्ट पेश करता है। 'प्रसाद टू पावर' के जरिए गणेश मंडप में बनने वाले कचरे का इस्तेमाल अस्पतालों के संसाधनों के लिए किया जाएगा। श्रद्धा के प्रसाद और पर्यावरण की देखभाल को एक साथ जोड़ने वाली यह पहल आगे चलकर कचरा मैनेजमेंट के लिए एक अच्छी मिसाल बन सकती है, और अगर यह सफल रहती है तो इसे आगे और भी बड़े गणेशोत्सव मंडलों में अपनाया जा सकता है।

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