मुंबई में नौ महीने में 1,80,103 लोगों की जांच, महापालिका का जोर बीमारी जल्द पकड़ने पर
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मुंबई महापालिका जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 1 लाख 80 हजार 103 लोगों की गैर संक्रामक बीमारियों की जांच कर चुकी है।
मुंबई महानगरपालिका अब इस पर ज्यादा ध्यान दे रही है कि बीमारी बढ़ने के बाद लोग अस्पताल भागें, इससे पहले ही उसका खतरा पहचान लिया जाए और इलाज शुरू हो जाए। इसी सोच के साथ महानगरपालिका प्रिवेंटिव यानी बचाव वाली स्वास्थ्य सेवा का दायरा बढ़ा रही है।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर और मानसिक सेहत की दिक्कतों को ध्यान में रखकर यह विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए विभागीय दवाखाने, हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे आपला दवाखाना और आरोग्य केंद्रों का सहारा लिया जा रहा है।
आंकड़े देखें तो जनवरी से सितंबर 2026 के नौ महीनों में कुल 1 लाख 80 हजार 103 लोगों की गैर संक्रामक बीमारियों के लिए जांच की गई।
महानगरपालिका का जोर सिर्फ बीमारी पकड़ने पर नहीं है। जिन लोगों पर शुरुआती जांच में शक होता है, उन्हें आगे के इलाज से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे संदिग्ध मरीजों को महानगरपालिका के अस्पतालों में भेजा जाता है, ताकि इलाज का सिलसिला बीच में न टूटे।
मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों को जीवनशैली में बदलाव के लिए आहार विशेषज्ञों का मार्गदर्शन दिया जाता है। जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान 65 हजार 85 लोगों को खान पान से जुड़ी काउंसलिंग दी गई।
कैंसर की जल्द पहचान के लिए भी बड़े पैमाने पर जांच हुई। महानगरपालिका के मुताबिक 2025 में मुख कैंसर की 2 लाख 72 हजार 428 जांचें की गईं। इसी साल स्तन कैंसर की 27 हजार 774 और गर्भाशय मुख कैंसर की 11 हजार 689 जांचें हुईं।
मानसिक सेहत को भी प्राथमिकता में रखा गया है। महानगरपालिका के 'मनशक्ति' कार्यक्रम के तहत 2025 में 1 लाख 68 हजार 687 लोगों को काउंसलिंग दी गई। वहीं 2026 के पहले नौ महीनों में 72 हजार 18 लोगों को काउंसलिंग मिली।
कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए 'हेल्दी कैंपस' पहल भी चलाई जाएगी। इसके जरिए खान पान और जीवनशैली को लेकर जागरूकता फैलाई जाएगी।
महानगरपालिका का कहना है कि इन कोशिशों का मकसद प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के जरिए बीमारियों की जल्द पहचान करना और इलाज की पहुंच बढ़ाना है।
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