मुंबई में एडिट्स फिल्म फेस्टिवल खत्म, इशांक गुप्ता, सान्या रोहिल्ला और अहसान वझीर बने विजेता
इंस्टाग्राम के एडिट्स ऐप से जुड़े 45 दिन के फेस्टिवल में तीन क्रिएटर्स को विजेता चुना गया। कार्यक्रम में फराह खान और 100 से ज्यादा कंटेंट क्रिएटर्स मौजूद थे।
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मुंबई में अगस्त महीने में शुरू हुआ एडिट्स फिल्म फेस्टिवल अब खत्म हो गया है। यह 45 दिन का आयोजन था। इसमें बेहतरीन स्टोरीटेलिंग और कंटेंट एडिटिंग के लिए एडिट्स का असरदार इस्तेमाल करने वाले क्रिएटर्स को सम्मानित किया गया।
इशांक गुप्ता (@filmmaker.ishank), सान्या रोहिल्ला (@bunniestbunnytoeverbunny) और अहसान वझीर (@ahsan_vazir__) अपनी रचनात्मक कलाकृतियों के दम पर विजेता बने। समापन कार्यक्रम में फिल्म निर्माती फराह खान मौजूद थीं। फेस्टिवल के जज अहसास चन्ना, डॉली सिंग, निखिल तनेजा और राजीव मसंद भी आए थे। इनके अलावा 100 से ज्यादा कंटेंट क्रिएटर्स भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
एडिट्स फिल्म फेस्टिवल के लिए सबमिशन अगस्त महीने में शुरू हुए थे। 45 दिन के इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले क्रिएटर्स से कहा गया था कि वे अपने कैमरा रोल में पड़े बिना एडिट किए वीडियो से अपना कंटेंट बनाएं। इसके लिए इंस्टाग्राम के वीडियो एडिटिंग ऐप 'एडिट्स' का इस्तेमाल करना जरूरी था।
फेस्टिवल में चुनी गई कलाकृतियों ने इस आइडिया की रचनात्मक संभावनाएं दिखाईं। जजों की चुनी हुई टॉप तीन कलाकृतियों में हिम्मत, सब्र और एडिटिंग की समझ का अच्छा मेल दिखा। कहानी कहने के अलग-अलग अंदाज और एडिटिंग के खास इस्तेमाल की वजह से इशांक गुप्ता, सान्या रोहिल्ला और अहसान वझीर की कलाकृतियों ने खास ध्यान खींचा। विजेताओं को अहसास चन्ना, डॉली सिंग, निखिल तनेजा और राजीव मसंद ने चुना।
मेटा इंडिया के हेड ऑफ ग्लोबल पार्टनरशिप्स अंकित रिहाल ने इस आयोजन पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "क्रिएटर्स को सही टूल्स, प्लेटफॉर्म्स और मौके देना हमारे काम के केंद्र में है। इस फेस्टिवल से नई रचनात्मक संभावनाएं खुलीं और क्रिएटर्स को ऐसे फीचर्स के साथ प्रयोग करने का हौसला मिला, जो उन्होंने पहले इस्तेमाल नहीं किए थे। उन्हें नए तरीके से कहानी सुनाने की भी हिम्मत मिली। हम अपने ज्यूरी सदस्यों और फराह खान के आभारी हैं। उन्होंने अपनी स्टोरीटेलिंग के सफर का अनमोल अनुभव और नजरिया हमारे साथ शेयर किया।"
फराह खान फेस्टिवल में खास मेहमान के तौर पर आई थीं। फिल्म निर्माण से लेकर सोशल मीडिया के ऑनलाइन कंटेंट तक का उनका अनुभव वहां मौजूद लोगों के लिए अहम रहा। थिएटर के लिए फीचर फिल्में बनाते वक्त और सोशल मीडिया के लिए रील्स बनाते वक्त कहानी कहने का अंदाज कैसे बदलता है, इस पर उन्होंने अपनी राय रखी।
सोशल मीडिया पोस्ट की प्लानिंग के बारे में फराह खान ने कहा, "लोगों को लगता है कि मेरी हर पोस्ट के पीछे कोई बड़ा प्लान होता है, लेकिन मैं क्या पोस्ट करती हूं, इस पर ज्यादा सोचती नहीं। जनरेशन Z ने मुझे बहुत प्रेरणा दी है। वे इस मामले में बहुत सहज होते हैं, बिना कोई दूसरा विचार किए। चाहे मेरे शो का कोई क्लिप हो, कोई यूं ही हुई बातचीत हो या पल भर में सूझा कोई शरारती आइडिया हो, मेरे लिए सब कुछ एकदम स्पॉन्टेनियस होता है। मुझे लगता है कि रिलेटेबिलिटी, रिअलनेस और उसके साथ थोड़ा ह्यूमर, इसी पर इंस्टाग्राम के दर्शक सच में रिस्पॉन्ड करते हैं।"
फराह खान की बातों में डिजिटल माध्यमों में सहजता, हकीकत से जुड़े कंटेंट और विनोद की अहमियत उभरकर आई। क्रिएटर्स को नए आइडिया रखने और एडिटिंग के अलग-अलग तरीके आजमाने का मंच देने वाला यह फेस्टिवल रचनात्मकता को बढ़ावा देने वाला आयोजन रहा।
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