मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

मुंबई में विसर्जन के बाद निकला 2,754 मेट्रिक टन कचरा, मुलुंड सेंटर में जमा

मुंबई महापालिका ने गणेशोत्सव के बाद विसर्जन स्थलों से निकले पीओपी मूर्तियों के मलबे का संकलन कर मुलुंड के अस्थायी केंद्र में पहुंचाया।

मुंबई में विसर्जन के बाद निकला 2,754 मेट्रिक टन कचरा, मुलुंड सेंटर में जमा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गणेशोत्सव के दौरान विसर्जन हो चुकी मूर्तियों और उसके साथ निकलने वाले मलबे को पर्यावरण के हिसाब से ठिकाने लगाने के लिए मुंबई महापालिका ने इस बार बड़े पैमाने पर मुहिम चलाई। 16 से 27 सितंबर 2026 के बीच के 12 दिनों में मुंबई भर से कुल 2,754.85 मेट्रिक टन विसर्जन के बाद का सामान इकट्ठा किया गया, जिसे मुलुंड में बनाए गए तय अस्थायी स्टोरेज सेंटर तक पहुंचाया गया। इतनी बड़ी मात्रा में सामान की ढुलाई के लिए महापालिका के घनकचरा व्यवस्थापन विभाग ने कुल 707 गाड़ी फेरे लगाए।

यह पूरी कवायद मुंबई हाई कोर्ट के समय-समय पर दिए गए आदेशों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशों का पालन करने के लिए की गई। दरअसल पारंपरिक शाडू मिट्टी की तरह प्लास्टर ऑफ पैरिस यानी पीओपी पानी में अपने आप घुलती नहीं है।

पानी में विसर्जन के बाद पीओपी की मूर्तियां गीली और भुरभुरी हो जाती हैं, जिसकी वजह से इन्हें इकट्ठा करने, गाड़ियों में लादने और उतारने के दौरान मूर्तियों के टुकड़े अपने आप अलग हो जाते हैं। तय समय के भीतर यह भारी मात्रा में जमा मलबा कृत्रिम तालाबों से सुरक्षित निकालने के लिए टीमों को मशीनों का सहारा लेना पड़ा। ढुलाई के लिए साफ-सुथरी और पूरी तरह ढकी हुई गाड़ियां इस्तेमाल की गईं। हर फेरे का वजन सरकारी कांटे पर दर्ज किया गया और फोटो-वीडियो के जरिए रोज की प्रगति की रिपोर्ट रखी गई, यह जानकारी घनकचरा व्यवस्थापन विभाग के डिप्टी कमिश्नर किरण दिघावकर ने दी।

आंकड़ों के मुताबिक 26 सितंबर को एक ही दिन में सबसे ज्यादा ढुलाई दर्ज हुई। इस दिन महापालिका की 131 गाड़ियों के फेरों से 510.92 मेट्रिक टन मलबा ढोया गया। इसके बाद 20 सितंबर को 119 गाड़ियों से 436.33 मेट्रिक टन और 19 सितंबर को 108 गाड़ियों से 404.08 मेट्रिक टन सामान की ढुलाई हुई। विसर्जन के पहले ही दिन, यानी 16 सितंबर को भी 99 फेरों में 366.03 मेट्रिक टन मलबा ठिकाने लगाया गया था।

वार्ड के हिसाब से देखें तो अंधेरी पश्चिम, जुहू और वर्सोवा इलाके वाले 'के/पश्चिम' वार्ड से सबसे ज्यादा 314.82 मेट्रिक टन मलबा ढोया गया, जिसके लिए 115 गाड़ियां लगाई गई थीं। इसके बाद भांडुप और कांजूरमार्ग वाले 'एस' वार्ड से 101 गाड़ी फेरों में 253.58 मेट्रिक टन और ग्रांट रोड, मलबार हिल वाले 'डी' वार्ड से 21 फेरों में 249.43 मेट्रिक टन सामान इकट्ठा हुआ। इसके अलावा दादर-माहिम के 'जी/उत्तर' वार्ड से 190.42 मेट्रिक टन और मुलुंड के 'टी' वार्ड से 155.36 मेट्रिक टन विसर्जन के बाद का सामान अस्थायी सेंटर तक भेजा गया।

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