मुंबई के सात कोलीवाड़ों की सीमा तय करने के लिए नौ सदस्यीय समिति, तीन महीने में रिपोर्ट
राज्य सरकार ने मुंबई के सात कोलीवाड़ों के सीमांकन के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई है। समिति तीन महीने के अंदर सरकार को सिफारिश रिपोर्ट सौंपेगी।
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मुंबई शहर के सात कोलीवाड़ों के सीमांकन का मामला सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सूचना पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की पहल से यह फैसला लिया गया। समिति की अध्यक्षता कोकण विभागीय आयुक्त करेंगे।
यह समिति सीमांकन के पैमाइश नक्शों पर आई आपत्तियों यानी एतराज़ों पर गौर करेगी और तीन महीने के अंदर सरकार को अपनी सिफारिश रिपोर्ट सौंपेगी।
जिन सात कोलीवाड़ों का सीमांकन होना है, वे हैं शिवड़ी, सायन, कुलाबा, माहीम (माहीम मार्केट समेत), मांडवी-प्रिंसेस डॉक, वरली और कफ परेड। इन कोलीवाड़ों के लिए पहले मौके पर जाकर निरीक्षण और पैमाइश की गई थी और उसके आधार पर नक्शे तैयार किए गए थे। लेकिन इन नक्शों में दिखाई गई सीमाओं पर अलग-अलग प्राधिकरणों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसीलिए सीमांकन को अंतिम रूप देने के लिए सरकार ने समिति बनाने का फैसला किया।
समिति में कुल नौ सदस्य हैं। कोकण विभागीय आयुक्त अध्यक्ष हैं। उनके अलावा बंदोबस्त आयुक्त और संचालक, भूमि अभिलेख, महाराष्ट्र राज्य, पुणे, बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त (शहर), मुंबई शहर और मुंबई उपनगर के जिलाधिकारी, बृहन्मुंबई महानगरपालिका के नगर अभियंता विभाग के शहर अभियंता, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के संचालक और मत्स्य व्यवसाय विभाग के सहायक आयुक्त भी समिति में शामिल हैं। कोकण प्रदेश के उपसंचालक, भूमि अभिलेख समिति के सदस्य सचिव हैं।
समिति मुंबई शहर के जिलाधिकारी कार्यालय के बनाए सात कोलीवाड़ों के पैमाइश नक्शों को देखेगी। इन नक्शों पर जिन्होंने आपत्तियां दर्ज कराई हैं, उन आपत्ति दर्ज कराने वालों और कोली संगठनों के प्रतिनिधियों की बात सुनी जाएगी। इसके बाद सीमांकन अंतिम करने के बारे में सरकार को सिफारिश की जाएगी।
इस फैसले पर बावनकुले ने कहा कि कोली बांधव मुंबई के मूल निवासी हैं और उनके हक की रक्षा करना सरकार का पहला कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री फडणवीस की सूचना के बाद तुरंत अमल करते हुए यह आदेश निकाला गया है। बावनकुले के मुताबिक 12 साल से अटका यह मामला अब सुलझेगा। नौ सदस्यों की इस समिति को तीन महीने के अंदर पूरी पारदर्शिता से अध्ययन कर अपनी स्वतः स्पष्ट रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
बावनकुले ने यह भी कहा कि किसी भी कोली बांधव के हक पर आंच नहीं आने दी जाएगी। सरकार उनकी जमीन की रक्षा करने और विकास के काम तेजी से पूरे करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।